नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ (एफएनसीसीआई) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अंजन श्रेष्ठ ने सरकार को नसीहत दी है कि वह उद्योग चलाने के बजाय निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने पर ध्यान दे। गारमेंट एसोसिएशन नेपाल द्वारा आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा हेटौंडा कपड़ा उद्योग जैसे संस्थानों को फिर से जीवित करने का प्रयास निजी क्षेत्र के लिए बाधा बन सकता है। श्रेष्ठ के अनुसार, करदाताओं के पैसे से सरकारी संस्थानों को सब्सिडी देकर निजी क्षेत्र के साथ प्रतिस्पर्धा कराना आर्थिक रूप से गलत है।

नेपाल का गारमेंट उद्योग, जो कभी 1,250 मिलों के साथ फलता-फूलता था, अब घटकर मात्र 100 तक सीमित रह गया है। इस गिरावट को रोकने के लिए श्रेष्ठ ने 'फार्म, फाइबर, फैब्रिक, फैशन और फॉरेन' (पाँच एफ) का एकीकृत मॉडल पेश किया है। उन्होंने इस क्षेत्र के विकास के लिए एक समर्पित 'गारमेंट काउंसिल' के गठन की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, नेपाल की 70 प्रतिशत आयात निर्भरता वास्तव में स्थानीय विनिर्माण के लिए एक बड़ा अवसर है, जहाँ सुई से लेकर ऑटोमोबाइल असेंबली तक का काम स्वदेश में ही किया जा सकता है।

आगामी चुनौतियों का जिक्र करते हुए श्रेष्ठ ने चेतावनी दी कि युवाओं का पलायन और गिरती जन्म दर भविष्य में जनशक्ति का संकट पैदा कर सकती है। इसके अलावा, एलडीसी (अल्पविकसित देश) की श्रेणी से बाहर निकलने पर निर्यातकों को मिलने वाली छूट समाप्त होने का खतरा है। महासंघ इस संक्रमण को तीन साल के लिए टालने हेतु सरकार पर दबाव बना रहा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि निर्यातकों के लिए घोषित नकद प्रोत्साहन राशि का समय पर भुगतान किया जाए ताकि सरकारी तंत्र पर व्यापारियों का भरोसा बना रहे। महासंघ के आगामी चुनाव के बाद कमान संभालने जा रहे श्रेष्ठ ने सभी व्यवसायियों को उनकी क्षमता के अनुसार भूमिका देते हुए निजी क्षेत्र को एकजुट करने का संकल्प लिया है।