नेपाल के प्रसिद्ध फेवा ताल के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए पोखरा महानगरपालिका ने झील के किनारे स्थित अवैध निर्माणों को ढहाना शुरू कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने के क्रम में महानगर ने झील के 65 मीटर के दायरे में आने वाले अनधिकृत ढांचों पर शुक्रवार रात से बुलडोजर चलाना शुरू किया।
महापौर धनराज आचार्य के अनुसार, यह अभियान संघीय, प्रांतीय और स्थानीय सरकारों के संयुक्त समन्वय से चलाया जा रहा है। पिछले जुलाई में झील के सीमांकन का कार्य पूरा होने के बाद, अब अतिक्रमण हटाना अगला महत्वपूर्ण चरण है। महापौर ने स्पष्ट किया कि अदालत से कोई स्थगन आदेश नहीं मिलने के कारण प्रशासन अपने पूर्व निर्धारित संरक्षण अभियान को गति दे रहा है।
दूसरी ओर, इस अचानक हुई कार्रवाई से स्थानीय व्यवसायी गहरे गुस्से में हैं। प्रभावित व्यवसायियों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना और मुआवजे के रात के अंधेरे में तोड़फोड़ शुरू कर दी। स्थानीय व्यवसायी प्रकृति सुवेदी ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासन ने पहले भूमि वर्गीकरण और मुआवजा देने का वादा किया था, लेकिन अब बिना किसी तैयारी के यह दमनकारी कदम उठाया गया है।
व्यवसायियों ने प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए मांग की है कि झील संरक्षण के नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे झील के बचाव के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन प्रक्रिया पारदर्शी और न्यायसंगत होनी चाहिए। हालांकि, महानगर प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि इस संबंध में पहले ही कई बार सार्वजनिक नोटिस जारी किए जा चुके थे और ताल के अस्तित्व को बचाने के लिए यह कार्रवाई जारी रहेगी।