ऑस्ट्रेलिया की विदेश और सुरक्षा नीति में भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है। हाल के घटनाक्रम संकेत देते हैं कि कैनबरा अब नई दिल्ली को केवल आर्थिक सहयोगी नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक प्रमुख रणनीतिक और सुरक्षा साझेदार के रूप में देख रहा है।

ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस की नई दिल्ली यात्रा ने दोनों देशों के बढ़ते रक्षा और सुरक्षा सहयोग को फिर से चर्चा में ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संबंध अब व्यापक रणनीतिक साझेदारी का रूप ले चुका है।

पिछले कुछ वर्षों में रक्षा, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान और संयुक्त सैन्य अभ्यासों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इन क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग दोनों देशों के बीच विश्वास और समन्वय को मजबूत कर रहा है।

भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और जापान के क्वाड समूह ने भी इस साझेदारी को नई गति दी है। क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से सदस्य देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

आर्थिक क्षेत्र में भी दोनों देशों के रिश्ते मजबूत हो रहे हैं। खनिज संसाधन, ऊर्जा, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और सप्लाई चेन विविधीकरण जैसे क्षेत्रों में साझेदारी का विस्तार किया जा रहा है।

विश्लेषकों के अनुसार क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियां, बदलता वैश्विक शक्ति संतुलन और सप्लाई चेन से जुड़े जोखिम ऑस्ट्रेलिया को भारत के और करीब ला रहे हैं। यदि वर्तमान गति बनी रही तो आने वाले वर्षों में भारत और ऑस्ट्रेलिया इंडो-पैसिफिक सुरक्षा ढांचे के प्रमुख साझेदारों में शामिल हो सकते हैं।