काठमांडू — काठमांडू महानगरपालिका में कानून लागू करने के क्रम में एक व्यक्ति द्वारा आत्मदाह किए जाने के बाद नगर पुलिस का मनोबल बुरी तरह गिर गया है। इसका सीधा असर घाटी की मुख्य और व्यस्त सड़कों पर दिखने लगा है। हाल के दिनों में व्यस्त क्षेत्रों में नगर पुलिस की उपस्थिति लगभग शून्य होने के कारण फुटपाथ विक्रेताओं और वाहन चालकों ने स्थानीय सरकार की बात मानना छोड़ दिया है।
आत्मदाह की घटना के बाद घटा नगर पुलिस का मनोबल
महानगर की सख्त नीति और कानून कार्यान्वयन के सिलसिले में ही घटित आत्मदाह की इस अप्रत्याशित घटना ने नगर पुलिस प्रशासन को बड़ा झटका दिया है। कार्यक्षेत्र में तैनात रहने के दौरान अपनी सुरक्षा की गारंटी न होने की बात कहते हुए नगर पुलिसकर्मी फील्ड में निकलने से कतराने लगे हैं। पुलिस प्रशासन द्वारा फील्ड में तैनात नगर पुलिसकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित न कर पाने के कारण उनकी कार्यक्षमता और सक्रियता में भारी गिरावट देखी जा रही है।
न्यू रोड क्षेत्र में कोलाहल और मनमानी पार्किंग
नगर पुलिस की अनुपस्थिति का फायदा उठाते हुए काठमांडू के मुख्य व्यापारिक केंद्र न्यू रोड सहित अन्य क्षेत्र फिर से अपनी पुरानी स्थिति में लौट आए हैं। फुटपाथ विक्रेताओं ने फुटपाथों पर कब्जा कर लिया है, जबकि मनमानी पार्किंग ने आम जनता और वाहन चालकों दोनों की परेशानी बढ़ा दी है।
"इस समय तो महानगर का डर ही खत्म हो चुका है। नगर पुलिस के आना बंद करने के बाद फुटपाथ व्यापारी और वाहन चालक स्थानीय सरकार की अनदेखी करते हुए मनमानी कर रहे हैं," एक स्थानीय नागरिक ने अपना दुख व्यक्त किया।
पर्दे के पीछे 'बालेन' का प्रभाव और कार्यवाहक प्रमुख डंगोल की मुश्किलें
कई लोगों का मानना है कि काठमांडू महानगरपालिका में अभी भी पूर्व नगर प्रमुख और वर्तमान प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन) का प्रभाव कायम है। महानगरपालिका आज भी उन्हीं की नीतियों और निर्देशों पर चलती हुई दिखाई देती है। उदाहरण के लिए:
- सुकुम्बासी (अवैध) बस्तियों को हटाने का अभियान
- होल्डिंग सेंटर का प्रबंधन
- फुटपाथ प्रबंधन
जैसे दीर्घकालिक और आक्रामक कार्य बालेन की प्रत्यक्ष रुचि (Interest) के तहत ही हो रहे हैं।
दूसरी ओर, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी) से उपमेयर निर्वाचित होकर वर्तमान में कार्यवाहक नगर प्रमुख की जिम्मेदारी संभाल रहीं सुनीता डंगोल इस समय वैचारिक दबाव में दिख रही हैं। डंगोल कम्युनिस्ट आचरण और मूल्यों के अनुरूप नगर प्रशासन चलाना चाहती हैं। लेकिन, महानगर के जनप्रतिनिधि खुद स्वीकार करते हैं कि व्यावहारिक रूप से ऐसा सोच के अनुरूप नहीं हो पा रहा है।
महानगर के एक वडा अध्यक्ष ने नाम न छापने की शर्त पर कहा:
"कार्यवाहक प्रमुख जी पार्टी की नीति और आचरण के अनुरूप गरीबों एवं निम्न वर्ग के पक्ष में काम करना चाहती हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थिति और बालेन की पुरानी नीति के कारण सोच के मुताबिक गरीब-उन्मुख काम नहीं हो पा रहा है।"
प्रशासनिक नेतृत्व और राजनीतिक विचारधारा के बीच इस अंतर्द्वंद तथा नगर पुलिस के कमजोर मनोबल के कारण काठमांडू को एक बार फिर से पुरानी अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है।