डॉ. अमरीन्द्र यादव ने 'नेपाल आज' को एक खंडन पत्र भेजा है। प्रेस काउंसिल नेपाल द्वारा जारी पत्रकार आचार संहिता के प्रावधानों के अनुसार यह समाचार प्रकाशित किया गया है। डॉ. यादव का वक्तव्य यहाँ निष्पक्ष रूप से शामिल किया गया है।

मधेश प्रदेश सरकार की विकास योजनाएं दिलाने के नाम पर रकम और कमीशन वसूलने के आरोप में रामेश्वर पराजुली की गिरफ्तारी को लेकर 'नेपाल आज ऑनलाइन' में प्रकाशित समाचारों पर डॉ. अमरीन्द्र यादव ने गंभीर ध्यान आकर्षित करते हुए स्पष्ट खंडन किया है। गत सावन 30 और सावन 32 को प्रकाशित समाचारों में अपना नाम अनावश्यक रूप से जोड़े जाने और पराजुली को 'संरक्षण' देने वाले व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किए जाने पर उन्होंने उन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

खंडन पत्र में डॉ. यादव ने स्पष्ट किया है कि रामेश्वर पराजुली के साथ उनका केवल सामाजिक परिचय है, लेकिन उनके व्यक्तिगत लेनदेन या किसी भी प्रकार के वित्तीय सौदों में उनकी कोई संलिप्तता नहीं है। उन्होंने उल्लेख किया कि पराजुली पर पुलिस द्वारा की जा रही जांच और सच्चाई सामने लाने की प्रक्रिया में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, और इस घटना में उनकी कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका नहीं है।

डॉ. यादव का कहना है कि उन्होंने मधेश प्रदेश सरकार की किसी भी योजना को दिलवाने या किसी से रकम वसूलने में कभी भी कोई सहयोग, संरक्षण या सुविधा प्रदान नहीं की है। उन्होंने उल्लेख किया कि यदि पराजुली ने किसी से रकम ली है या कोई वित्तीय लेनदेन किया है, तो उसकी जिम्मेदारी खुद पराजुली को उठानी होगी। इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति जताई है कि उनके खिलाफ कोई आधिकारिक प्रमाण, प्राथमिकी (जाहरी), बैंक लेनदेन या पुलिस रिपोर्ट न होने की स्थिति में अप्रमाणित स्रोतों के आधार पर उनका नाम जोड़ा गया है।

समाचार में खुद को 'निकट व्यक्ति' बताए जाने से सामाजिक और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा प्रभावित होने तथा पाठकों में भ्रम पैदा होने का उनका मानना है। समाचार प्रकाशित करने से पहले उनकी प्रतिक्रिया या राय लिए बिना समाचार प्रसारित किए जाने को निष्पक्ष पत्रकारिता की भावना के प्रतिकूल बताते हुए, उन्होंने इस गंभीर विषय पर भ्रम दूर करने के लिए खंडन प्रकाशित करने और 'निकट व्यक्ति' के उल्लेख में सुधार करने की मांग की है। डॉ. यादव ने इस खंडन पत्र की एक प्रति प्रेस काउंसिल नेपाल को भी भेजी है।

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