नेपाली समाज में आपसी सौहार्द और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करते हुए, इस्लाम धर्म का प्रमुख त्योहार ईद-उल-फितर आज पूरे देश में अत्यंत उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। एक महीने तक चलने वाले पवित्र रमजान के रोजे (उपवास) के बाद चांद का दीदार होने पर इस पर्व की शुरुआत होती है, जो समाज में शांति और सहिष्णुता का व्यापक संदेश दे रहा है।

सुबह से ही काठमांडू के घंटाघर स्थित जामे मस्जिद और कश्मीरी मस्जिद सहित देशभर की विभिन्न मस्जिदों और ईदगाहों में अकीदतमंदों की भारी भीड़ देखी जा रही है। सुबह के समय स्नान कर और नए परिधान पहनकर लोगों ने सामूहिक नमाज अदा की। इस दौरान विशेष रूप से देश की तरक्की, शांति और आपसी भाईचारे के लिए दुआएं मांगी गईं। नमाज के तुरंत बाद लोग एक-दूसरे के गले लगकर 'ईद मुबारक' की बधाइयां दे रहे हैं।

यह त्योहार केवल उत्सव और प्रार्थनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में आर्थिक समानता का एक शक्तिशाली तंत्र भी स्थापित करता है। 'जकात' और 'फितरा' के रूप में गरीबों और असहायों को अनिवार्य दान देने की परंपरा यह सुनिश्चित करती है कि समाज का हाशिए पर रहने वाला वर्ग भी इन खुशियों में शामिल हो सके।

घरों में सेवईं और खजूर जैसे पारंपरिक पकवान तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ साझा किया जाता है। यह पावन अवसर नेपाल के विविध समुदायों के बीच सांस्कृतिक एकजुटता को भविष्य में और अधिक प्रगाढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।