सरकार द्वारा पुलिस संगठन और उसके प्रमुख के खिलाफ की गई जिम्मेदारी में फेरबदल की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए जेन-जी अभियान्ता अजय सोडारी ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार सत्ता और शक्ति का दुरुपयोग कर पुलिस संगठन को अपने निजी स्वार्थ साधने का जरिया बना रही है।

एक बयान जारी करते हुए सोडारी ने कहा कि सरकार की यह नियोजित कार्रवाई पूरी तरह से गैर-कानूनी और बेहद संवेदनशील है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हालिया जेन-जी आंदोलन के बाद पुलिस संगठन धीरे-धीरे अपनी सामान्य कार्यप्रणाली में लौट रहा था, ऐसे में उस पर किया गया यह हमला संस्था को बदनाम और नष्ट करने की साजिश का हिस्सा है।

सोडारी ने इस तरह के अनुचित हस्तक्षेप के खिलाफ एकजुट होकर प्रतिवाद करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने आग्रह किया है कि स्वयं पुलिस संगठन, देशभक्त नागरिकों और जेन-जी युवाओं को इस तरह के अनुचित फैसलों के सामने चुप नहीं बैठना चाहिए।

पुलिस नेतृत्व और संगठन पर सरकारी दबाव की बढ़ती आलोचनाओं के बीच, सुरक्षा बलों की स्वायत्तता बनाए रखने और प्रशासनिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए नागरिक स्तर पर विरोध की लहर और तेज होने की संभावना है।