वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है, जहाँ अमेरिका और यूरोपीय देश चीनी डिजिटल बुनियादी ढांचे को संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, चीन की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हरित ऊर्जा और स्मार्ट डेटा प्रणालियों को अब केवल आर्थिक प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। इसी सुरक्षा संशय के कारण हाल ही में मेटा एआई से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय समझौते के बाधित होने की खबर भी सामने आई है।

यूरोपीय देशों के नीति विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि चीनी सौर ऊर्जा उपकरणों और बैटरी तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य में डेटा सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। उनका मानना है कि डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से संवेदनशील जानकारी बाहरी नियंत्रण में जा सकती है। वहीं, अमेरिका में चीनी ऑटोमोबाइल और उन्नत तकनीक कंपनियों को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है, जहाँ कई सांसदों ने इसे सीधे तौर पर संप्रभु सुरक्षा से जोड़ा है।

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भारत के पड़ोसी देश नेपाल में भी चीनी तकनीकी उपकरणों और डिजिटल नेटवर्क का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर चल रही यह सुरक्षा बहस नेपाल जैसे देशों के लिए भी डेटा सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गई है। भविष्य में तकनीक का चयन केवल उपयोगिता पर नहीं, बल्कि सुरक्षा और राजनीतिक विश्वास के आधार पर तय होने की संभावना बढ़ गई है।