स्वैच्छिक श्रम और आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखकर बनाया गया "हर्कवाद" दर्शन अब प्रशासनिक जांच के दायरे में है। मार्च 2026 में सुनसरी-1 से प्रतिनिधि सभा के लिए चुने गए हर्क राज राई (हर्क साम्पाङ) द्वारा धरान में लागू किया गया मॉडल ऑडिट रिपोर्टों में वित्तीय और प्रक्रियागत कमियों के कारण चर्चा में है।
महालेखा परीक्षक के कार्यालय ने श्रम संस्कृति पार्क परियोजना में लगभग 11 लाख रुपये के खर्च पर आपत्ति जताई है, जिसे बिना किसी आधिकारिक बैठक या घोषणा के खर्च किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, यह परियोजना सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संरक्षित सार्दु नदी बेसिन के वन क्षेत्र में बनाई गई है, जो शहर की जल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है।
पानी की योजनाओं के लिए जुटाए गए करोड़ों रुपये के दान में भी पारदर्शिता की कमी पाई गई है। ऑडिट रिपोर्टों के अनुसार, यह पैसा नगरपालिका के आधिकारिक खातों से बाहर रखा गया और इसे औपचारिक प्रणाली में लाने के प्रस्तावों को कथित तौर पर ठुकरा दिया गया। सार्वजनिक खरीद अधिनियम के तहत अनिवार्य निविदा प्रक्रिया का पालन न करना भी एक बड़ी खामी के रूप में उभरा है।
साल 2025 के मध्य में, श्रम अभियान के तहत बनाई गई एक दीवार के लिए नगरपालिका से भुगतान की मांग को लेकर आंतरिक विवाद भी सामने आया था। उप-मेयर ऐन्द्र विक्रम बेघा ने इस प्रक्रिया को अनियमित करार दिया था। इसके अलावा, "माया धरानी" ब्रांड के तहत साबुन और हल्दी जैसे उत्पादों के निर्माण में भी सरकारी धन के इस्तेमाल और कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी के आरोप लगे हैं।
धरान में इन मुद्दों को उठाने वाले पत्रकारों पर दबाव और धमकी की खबरें भी मानवाधिकार दस्तावेजों में दर्ज की गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हर्कवाद का करिश्मा जन-एकजुटता के लिए तो प्रभावी है, लेकिन आधुनिक अर्थव्यवस्था की चुनौतियों और कानूनी जवाबदेही के मानकों पर यह मॉडल संघर्ष करता दिख रहा है।
श्रम संस्कृति पार्टी अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना चाहती है, लेकिन साम्पाङ के लिए असली चुनौती व्यक्तिगत ब्रांडिंग से हटकर संस्थागत सुशासन स्थापित करने की होगी। आने वाला संसदीय कार्यकाल यह तय करेगा कि क्या यह मॉडल नेपाल की बुनियादी ढांचागत समस्याओं का स्थायी समाधान बन पाता है या नहीं।