भारत द्वारा अपनी डिजिटल भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से विस्तारित करने की रणनीति नेपाल के आर्थिक परिदृश्य को बदलने का एक बड़ा जरिया बन सकती है। वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर अपने आर्थिक प्रभाव को बढ़ाने के लिए भारत जिस तरह से डिजिटल वित्तीय ढांचे का उपयोग कर रहा है, उससे पड़ोसी देश नेपाल के लिए विकास के नए द्वार खुलते नजर आ रहे हैं।
दोनों देशों के बीच खुली सीमा, प्रगाढ़ व्यापारिक रिश्ते और नागरिकों की बड़े पैमाने पर आवाजाही के कारण इस डिजिटल भुगतान प्रणाली के विस्तार से आम जनता और व्यापारियों को सीधा लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यूपीआई के प्रयोग से पर्यटन, लघु उद्योग, सीमावर्ती व्यापार और प्रवासियों द्वारा भेजे जाने वाले धन (रेमिटेंस) के लेन-देन को अधिक सुरक्षित, तीव्र और कम खर्चीला बनाया जा सकेगा।
वित्तीय मामलों के जानकारों के अनुसार, नेपाल जब अपनी डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है, ऐसे समय में भारतीय डिजिटल बुनियादी ढांचे के साथ समन्वय वित्तीय समावेशन को गति दे सकता है। यह तकनीक बैंकिंग सेवाओं से दूर रह रहे नागरिकों को मोबाइल के जरिए मुख्यधारा की वित्तीय प्रणाली से जोड़ने में बेहद मददगार साबित होगी।
नेपाल राष्ट्र बैंक भी देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने को प्राथमिकता देता रहा है, जिसके परिणामस्वरूप हाल के वर्षों में क्यूआर कोड, मोबाइल वॉलेट और इंटरबैंक डिजिटल लेनदेन में भारी उछाल देखा गया है। यूपीआई के साथ इस नेटवर्क के जुड़ने से नेपाल आने वाले भारतीय पर्यटकों के लिए भुगतान की प्रक्रिया बेहद आसान हो जाएगी, जिससे स्थानीय कारोबारियों को सीधा आर्थिक फायदा होगा।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आने वाले दशक में दक्षिण एशिया में आर्थिक प्रतिस्पर्धा का मुख्य आधार केवल पारंपरिक बुनियादी ढांचा नहीं, बल्कि डिजिटल कनेक्टिविटी होगी। इस बदलते दौर में, यदि नेपाल क्षेत्रीय डिजिटल नेटवर्क में अपनी भागीदारी बढ़ाता है, तो वह आर्थिक आधुनिकीकरण और वित्तीय पहुंच के अपने दीर्घकालिक लक्ष्यों को सफलतापूर्वक हासिल कर सकेगा।