दीपक कुमार त्यागी - अधिवक्ता, स्वतन्त्र पत्रकार, स्तम्भकार तथा राजनीतिक विश्लेषक


गठबंधन के दौर में चुनावी रणभूमि में राष्ट्रीय लोकदल के लिए एक बहुत बड़ा ट्रंपकार्ड हैं के.सी. त्यागी।

के.सी. त्यागी को राजनीति के दांव-पेंच का माहिर खिलाड़ी माना जाता है, सरकार व संगठन के स्तर पर उन्हें दमदार ढंग से कार्य करने का लंबा अनुभव है।

के.सी. त्यागी को राष्ट्रीय राजनीति में कार्य करने का लगभग 52 वर्षों का लंबा अनुभव है, देश में इतने अधिक वर्षों तक राष्ट्रीय स्तर पर राजनीति करने का सौभाग्य चंद ही राजनेताओं को मिला है।

के.सी. त्यागी ने प्रधानमंत्री से लेकर के देश के कई केंद्रीय मंत्रियों व कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ कंधे से कंधा मिलाकर के सरकार व संगठनात्मक स्तर पर कार्य किया है।

के.सी. त्यागी को बेहद ही कम उम्र में किसानों के मसीहा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह व लोकनायक जयप्रकाश नारायण के साथ कार्य करने का भी अनुभव प्राप्त है।

के.सी. त्यागी एक दौर में मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी रह चुके हैं, मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल में उन्हें उत्तर प्रदेश के मिनी मुख्यमंत्री का अघोषित दर्जा प्राप्त था, शासन व प्रशासन के बीच उनकी तूती बोलती थी।

के.सी. त्यागी बेहद लंबे समय तक मुलायम सिंह यादव के साथ-साथ शरद यादव, नीतीश कुमार के बेहद करीबी रणनीतिकार रहे हैं।

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सत्ता पक्ष , विपक्ष व अन्य दलों के दिग्गज राजनेता के साथ के.सी. त्यागी के प्रगाढ़ संबंध किसी से भी छुपे हुए नहीं हैं।

देश की सत्ता के सबसे ताकतवर केंद्र लुटियन जोन में के.सी. त्यागी का जबरदस्त जलवा हम सभी ने देखा है, वह दशकों से लुटियन जोन में सत्ता के केंद्र या करीबियों में शुमार रहे हैं।

के.सी. त्यागी के लुटियन जोन के प्रगाढ़ संबंधों का लाभ गठबंधन व अन्य राजनीतिक गुणा-भागों में भविष्य में राष्ट्रीय लोकदल को अवश्य मिलेगा।

जयंत चौधरी ने के.सी. त्यागी के अनुभव को सम्मान देते हुए उन्हें संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाकर के राष्ट्रीय लोकदल में युवा व अनुभवी नेतृत्व का एक ताकतवर गठजोड़ बनाया है।

जयंत चौधरी के द्वारा के.सी. त्यागी को संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाये जाने को राजनीतिक गलियारों में मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है, आने वाले समय में राष्ट्रीय लोकदल को जयंत चौधरी के इस कदम का लाभ अवश्य मिलेगा।

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों की रणभूमि में चुनावी नैया को पार लगाने के सभी राजनीतिक दल पिछले कुछ माह से ही अपने-अपने हिसाब से धरातल पर राजनीतिक बिसात बिछाने में व्यस्त हैं। वर्ष 2026 से ही यूपी की चुनावी रणभूमि में शह-मात का खेल बहुत तेज़ी से शुरू हो गया है। हर राजनीतिक दल ने अपनी चुनावी बिसात धरातल पर बिछानी शुरू कर रखी हैं, शीर्ष नेतृत्व अपने-अपने चुनावी योद्धाओं को हर मोर्चों की स्थिति का बहुत ही बारीकी से आंकलन करके तैनात कर रहा है और भविष्य के मद्देनजर अन्य दलों से जोड़-तोड़ कर रहा है। उसी कड़ी में कुछ माह जनता दल - यूनाइटेड (जेडीयू) के दिग्गज नेता के.सी. त्यागी ने भी 22 मार्च 2026 को दिल्ली में राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी की उपस्थिति में राष्ट्रीय लोकदल ज्वाइन की थी। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद से ही केंद्र व उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही थी। राजनीति के माहिर अधिकतर लोग यही कयास लगा रहे थे कि लोकसभा सांसद व राज्यसभा सांसद रहने के साथ-साथ लंबे समय से अपनी सफलतापूर्वक राजनीतिक पारी खेल रहे के.सी. त्यागी का राष्ट्रीय लोकदल में क्या भविष्य है और उनका पार्टी में कैसे एडजस्टमेंट हो पायेगा। हालांकि इस विचार को पार्टी ज्वाइन करते वक्त स्वयं के.सी. त्यागी के एक बयान ने भी ज्यादा हवा देने का कार्य किया था, क्योंकि उन्होंने ज्वाइनिंग के कार्यक्रम में मंच से ही कह दिया था कि राष्ट्रीय लोकदल में उन्हें कोई पद नहीं चाहिए, उनके उस बयान के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में कयास लगाया जा रहा था कि के.सी. त्यागी का लक्ष्य अब कुछ और ही है, वह देश व दुनिया भर में प्रसिद्ध चुनावी रणनीतिकार, राजनीति व समाजसेवा में सक्रिय अपने बेटे अमरीश त्यागी को राजनीतिक विरासत सौंपना चाहते हैं, लोगों को लगता था कि वह केवल अमरीश त्यागी को पसंदीदा विधानसभा सीट से चुनाव लड़वाकर उन्हें विधायक बनाकर एडजस्टमेंट करवाना चाहते हैं और स्वयं सक्रिय राजनीति से दूर हो जाना चाहते हैं। हालांकि के.सी. त्यागी की लोकदल में जबरदस्त सक्रियता ने राजनीति से दूर रहने की लोगों की आशंकाओं को पूरी तरह से असत्य साबित कर दिया है।

वैसे भी राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने भी के.सी. त्यागी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपते हुए उन्हें संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त करते हुए और स्वयं को उस संसदीय बोर्ड के एक मात्र सदस्य बनाकर के देश भर में एक बहुत बड़ा राजनीतिक संदेश दे दिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि के.सी. त्यागी को जयंत चौधरी ने संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाकर के बड़ा राजनीतिक संदेश दे दिया है। क्योंकि संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष अधिकतर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वयं ही होते हैं, लेकिन जयंत चौधरी ने ऐसा ना करके के.सी. त्यागी को यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा है और स्वयं बोर्ड के सदस्य बने हैं, जो स्थिति के.सी. त्यागी को राष्ट्रीय लोकदल में नंबर-2 की हैसियत वाला दिग्गज राजनेता बनाती है और जयंत चौधरी ने यह संदेश पार्टी के अन्य सभी राजनेताओं, कार्यकर्ताओं व आम जनमानस को भी स्पष्ट रूप से दे दिया है। यूपी की राजनीति को करीब से देखने वाले लोगों का मानना है कि के.सी. त्यागी को राष्ट्रीय लोकदल में मिले इस बेहद महत्वपूर्ण नए रोल से राजनीति में भविष्य में नए समीकरण बनेंगे। जयंत चौधरी की इस राजनीतिक बिसात से भविष्य में उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोकदल और मजबूत होगी ही साथ ही के.सी. त्यागी देश भर में पार्टी के संगठन का विस्तार करते हुए राष्ट्रीय लोकदल को एक नया आयाम दिलाने के लिए काम अवश्य करेंगे। वह राष्ट्रीय लोकदल को संगठनात्मक व चुनावी रणभूमि के स्तर पर पश्चिमी यूपी से बाहर निकाल करके पूरे उत्तर प्रदेश के साथ-साथ अब राष्ट्रीय स्तर पर कम से कम दिल्ली, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश और बिहार आदि जैसे राज्यों में मजबूत करने का भरसक प्रयास अवश्य करेंगे। हालांकि के.सी. त्यागी को केवल इन राज्यों तक ही सीमित करना भी उचित नहीं है, क्योंकि देशभर में राजनेताओं से उनके बहुत ही मधुर संबंध हैं, जिसका लाभ भविष्य में राष्ट्रीय लोकदल को मिलने की संभावना है।

वैसे तो के.सी. त्यागी के व्यक्तित्व को किसी भी जाति-धर्म के दायरे में नहीं बांधा जा सकता है, दशकों से उनकी जबरदस्त राजनीतिक पकड़ रही है, उनकी त्यागियों के साथ-साथ अन्य जाति व धर्म के मतदाताओं और किसान व खेती-बाड़ी आधारित आजीविका पर निर्भर रहने वाले लोगों के बीच मज़बूत पैठ है। वह कास्ट व धर्म के बैरियर को तोड़कर वोटर को प्रभावित करने की ताक़त रखते हैं। वह देश व दुनिया की बेहद ताकतवर मीडिया में आम जनमानस की सशक्त आवाज हैं, उनकी बोलने की शानदार शैली व ज्वलंत मुद्दों तक पर भी जबरदस्त वाकपटुता आम जनमानस को आकर्षित करती है। वैसे भी धरातल के हालातों व राष्ट्रीय लोकदल की राजनीति का निष्पक्ष रूप से आंकलन किया जाएं तो कहीं ना कहीं राष्ट्रीय लोकदल को चौधरी अजीत सिंह के निधन के बाद से लंबे अरसे से एक ऐसे बेहद ही चर्चित, रौबदार, गठबंधन चलाने में माहिर, गठबंधन के गुणा-भाग में माहिर, धरातल व संसदीय राजनीति के अनुभवी राजनेता की तलाश थी, जो पार्टी के लोकप्रिय राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर के चलने की क्षमता राजनीतिक रणभूमि में रखता हो। वह राजनेता नये लोगों को पार्टी से जोड़ कर के संगठन विस्तार का कार्य करते हुए, कार्यकताओं व आम जनमानस से बेहद प्रभावशाली ढंग से संवाद करने की क्षमता रखता हो। हालांकि पार्टी की यह तलाश अब तो पूरी हो चुकी है, क्योंकि अब देश के दिग्गज राजनेता, पूर्व सांसद के. सी. त्यागी ने अभी कुछ समय पहले ही जदयू को छोड़कर के व उनके बेटे अमरीश त्यागी ने भाजपा को छोड़कर राष्ट्रीय लोकदल ज्वाइन कर ली है। जिसके बाद से ही राष्ट्रीय लोकदल को मजबूत करने के लिए जहां एक तरफ़ तो राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने स्वयं ही मोर्चा संभाल रखा है, हाल ही में मथुरा व शामली आदि में उनकी विशाल रैली इसकी एक बानगी मात्र हैं। वहीं दूसरी तरफ़ कुछ माह पहले राष्ट्रीय लोकदल में शामिल हुए के.सी. त्यागी व उनके पुत्र अमरीश त्यागी का भी राष्ट्रीय लोकदल का शीर्ष नेतृत्व जमकर के उपयोग कर रहा है‌, दोनों दिन-रात एक करके जयंत चौधरी के हाथ व पार्टी को मजबूत करने के लिए संगठन विस्तार में लगें हुए हैं। जिसके चलते राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जयंत चौधरी व के.सी. त्यागी की यह जोड़ी अपने युवा व अनुभव के शानदार सामंजस्य के दम पर उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा के चुनावों में राष्ट्रीय लोकदल के प्रदर्शन को बेहतर करते हुए देश भर में पार्टी के संगठन का बखूबी विस्तार करने की क्षमता रखती है।