काठमांडू में सोमवार को आयोजित एक संवाद कार्यक्रम के दौरान नेपाल के प्रतिनिधि सभा के सदस्यों ने प्रसूति के समय होने वाली हिंसा को कानूनी रूप से अपराध के रूप में वर्गीकृत करने में देरी न करने पर बल दिया। महिला, कानून और विकास मंच (एफडब्ल्यूएलडी) द्वारा सम्मानजनक प्रसूति सेवा तथा प्रसूति हिंसा के निवारण हेतु आवश्यक कानून विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में सांसदों ने अपनी बात रखी।

कार्यक्रम में एफडब्ल्यूएलडी के अधिवक्ता दीपेश श्रेष्ठ ने प्रस्तुति देते हुए कहा कि प्रसवोत्तर दुर्व्यवहार और दबाव से मुक्त, सम्मानजनक तथा संवेदनशील प्रसूति ही वास्तविक सम्मानजनक सेवा है। उन्होंने व्हाइट रिबन एलायंस के आठ सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए अंतर्राष्ट्रीय संधियों के तहत नेपाल के दायित्वों की जानकारी दी। उन्होंने सुरक्षित मातृत्व तथा प्रजनन स्वास्थ्य अधिकार अधिनियम 2075 की धारा 6 (2) में संशोधन, क्षतिपूर्ति का प्रावधान और भेदभाव रहित सेवा सुनिश्चित करने की मांग की। इस दौरान बृजपानी आर्ट नाट्य समूह के कलाकारों ने नेपाली समाज के यथार्थ पर आधारित एक नाटक भी प्रस्तुत किया।

चर्चा के दौरान विभिन्न सांसदों ने स्वास्थ्य कर्मियों के व्यवहार और विधायी सुधारों पर विचार व्यक्त किए। सांसद बलावाती शर्मा और एलिजा गुरुंग ने प्रसव के समय हिंसा रोकने और चिकित्सकों की लापरवाही पर अंकुश लगाने हेतु कानून बनाने पर जोर दिया, जबकि सांसद ललिता कुमारी ने चिकित्सकों और नर्सों के अपमानजनक बयानों से बचने की चेतावनी दी। सांसद राधिका रमतेल ने कालिकोट और कर्णाली के दूरदराज इलाकों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां स्वास्थ्यकर्मियों के व्यवहार के कारण सम्मानजनक प्रसूति की कल्पना करना भी कठिन है।

अन्य सांसदों ने सामाजिक जागरूकता, शिक्षा और पारिवारिक सहयोग की आवश्यकता रेखांकित की। सांसद सुशीला ढकाल आचार्य, अच्युतम लामिछाने, पार्वती विक और सृजना श्रेष्ठ ने महिला शिक्षा तथा अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने पर बल दिया। सांसद हरि भुषाल ने कहा कि अस्पतालों के व्यवहार में अपेक्षित सुधार नहीं आया है, इसलिए कानून के प्रारूप निर्माण के समय ऐसी चर्चाएं उपयोगी हैं। सांसद अंबिका देवी संग्रौला ने सप्तरी की बबिता पासवान घटना का उदाहरण दिया, वहीं सांसद रंजू दर्शना ने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि सम्मानजनक प्रसूति के लिए मानसिक स्वास्थ्य और पति का सहयोग अत्यंत आवश्यक है।

वरिष्ठ अधिवक्ता गीता अर्याल की अध्यक्षता और अधिवक्ता दीदीक्षा सिंह के संचालन में संपन्न यह कार्यक्रम नीतिगत सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में प्रासंगिक कानूनों में संशोधन, स्वास्थ्य कर्मियों में व्यवहारगत बदलाव और सामाजिक चेतना का विकास ही नेपाल में सुरक्षित मातृत्व की नींव मजबूत करेगा।
