काठमांडू। खुद को भगवान विष्णु का अंतिम अवतार 'कल्कि' दावा करने वाले जय शाह ने देश में व्याप्त खाना पकाने वाली एलपीजी गैस की कमी को समाप्त करने के लिए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन) को महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। सोशल मीडिया के माध्यम से एक संदेश जारी करते हुए उन्होंने आयातित एलपीजी गैस के विकल्प के रूप में स्वदेश में ही गन्ने और जैविक पदार्थों से उत्पादित इथेनॉल का उपयोग करने की नवीन अवधारणा आगे रखी है।
नेपाल द्वारा हर साल अरबों रुपये मूल्य की एलपीजी गैस आयात किए जाने के संदर्भ में जय शाह ने स्वदेशी गन्ने और मोलासिस (गुड़) से इथेनॉल उत्पादन कर खाना पकाने के ईंधन के रूप में उपयोग करने की बात कही है। उनके अनुसार गन्ने से मोलासिस और चीनी होते हुए इथेनॉल का उत्पादन करने और उसे विशेष रूप से निर्मित इथेनॉल चूल्हे में प्रयोग किया जा सकता है। चूल्हे की कार्यक्षमता के आधार पर लगभग 32 से 38 लीटर इथेनॉल 14.2 किलोग्राम के एक एलपीजी गैस सिलेंडर के बराबर ऊर्जा देता है, ऐसा उनका दावा है।
इस नीति को अपनाने से आयातित गैस पर निर्भरता घटने के साथ-साथ गन्ना किसानों और स्थानीय चीनी तथा इथेनॉल उद्योगों को नया बाजार मिलेगा। इससे ईंधन खरीद के मद में बाहर जाने वाली बड़ी धनराशि को देश के भीतर ही रोकने, नेपाली किसानों की आय बढ़ाने और नवीकरणीय कृषि संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने में मदद मिलने की बात संदेश में उल्लेखित है।
हालांकि, सामान्य उपभोक्ता एलपीजी या केरोसिन के सामान्य चूल्हे में इथेनॉल या सर्जिकल स्पिरिट का उपयोग नहीं कर सकते और इसके लिए विशेष रूप से प्रमाणित इथेनॉल चूल्हा ही आवश्यक होने की बात कहते हुए उन्होंने तकनीकी सावधानी बरतने का आग्रह किया है। देश के भीतर ही ईंधन उत्पादन की प्रचुर संभावना होने के बावजूद विदेशी एलपीजी गैस पर निर्भर रहने की बाध्यता को समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाने हेतु उन्होंने प्रधानमंत्री बालेन शाह का ध्यान आकर्षित किया है।