नेपाल के स्वतंत्र सांसद महाबीर पुन ने सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र में फैले भारी वित्तीय शोषण को लेकर पिछली सरकारों के खिलाफ कड़ा असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने आम टैक्सी चालकों को होने वाली परेशानियों का हवाला देते हुए इस व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

सांसद पुन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, एक स्थानीय टैक्सी चालक की आपबीती से इस पूरे रैकेट का खुलासा हुआ। नेपाल में एक टैक्सी खरीदने के लिए ही चालकों को ३० से ३५ लाख रुपये की भारी रकम निवेश करनी पड़ती है।

इस बड़े निवेश के बावजूद चालकों की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं। वाहन खरीदने के बाद अनिवार्य काली नंबर प्लेट हासिल करने के लिए उनसे कथित तौर पर १५ लाख रुपये की अतिरिक्त रकम वसूली जा रही है।

पुन ने आरोप लगाया कि इस अवैध वसूली के पीछे परिवहन सिंडिकेट के माफिया और नेपाल सरकार की आपसी मिलीभगत है, जिसके कारण प्रशासन इस पर चुप्पी साधे बैठा है। ३०० प्रतिशत आयात कर चुकाने के बाद भी नंबर प्लेट के नाम पर १५ लाख रुपये ऐंठना एक बहुत बड़ा भ्रष्टाचार है।

इस काम में शामिल बिचौलियों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए उन्होंने व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की है। इस खुलासे के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि परिवहन क्षेत्र के इस सिंडिकेट को खत्म करने के लिए आने वाले दिनों में कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।