काठमांडू स्थित खाद्य प्रौद्योगिकी एवं गुणवत्ता नियंत्रण विभाग ने सोमवार को एक सार्वजनिक सूचना जारी कर पूजा, होम, हवन तथा दीपक जलाने के लिए इस्तेमाल होने वाले अखाद्य चिकने पदार्थों को घी के नाम से उत्पादन, भंडारण और बिक्री करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। नए दिशानिर्देशों के अनुसार धार्मिक कार्यों के लिए तैयार किसी भी तेल या चिकने पदार्थ को घी, वनस्पति घी, बेकरी शॉर्टनिंग या पूजा घी के नाम से बाजार में आपूर्ति नहीं की जा सकती।

बाजार निगरानी और उपभोक्ताओं से प्राप्त शिकायतों के आधार पर विभाग ने यह सख्त कार्रवाई की है। जांच में पाया गया कि कुछ उद्योगपति और व्यापारी वनस्पति घी, बेकरी शॉर्टनिंग, रिफाइंड तेल, विभिन्न सुगंधों, पैराफिन, मिनरल ऑयल और अन्य रासायनिक पदार्थों को मिलाकर पूजा के लिए चिकना पदार्थ तैयार कर बेच रहे थे। इन उत्पादों का रूप, रंग, गंध और पैकेजिंग खाने योग्य घी से बिल्कुल मेल खाती थी, जिससे आम जनता भ्रमित होकर इसका उपयोग रसोई में कर सकती थी और इससे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो रहा था।

विभाग द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, केवल पूजा या दीप प्रज्वलन के लिए निर्मित चिकने पदार्थों के लेबल पर घी, वनस्पति घी या बेकरी शॉर्टनिंग जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं किया जा सकता। इसके अतिरिक्त, ऐसे उत्पादों के पैकेट के सामने स्पष्ट रूप से बड़े अक्षरों में 'खाने के लिए नहीं' लिखना अनिवार्य होगा और साथ ही काले रंग का क्रॉस निशान 'X' भी लगाना होगा। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि खाने योग्य घी निर्माताओं को भी खाद्य स्वच्छता एवं गुणवत्ता अधिनियम, २०८१ के तहत निर्धारित लेबल विवरण अनिवार्य रूप से दर्ज करने होंगे।

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खाद्य और गैर-खाद्य उत्पादों के बीच मिलावट रोकने तथा उपभोक्ताओं को भ्रमित करने की प्रवृत्ति को समाप्त करने के लिए यह कदम उठाया गया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि सरकारी आदेशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य स्वच्छता एवं गुणवत्ता अधिनियम, २०८१ के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस प्रशासनिक सख्ती से बाजार में होने वाली मिलावट पर अंकुश लगने और उपभोक्ता स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित होने की उम्मीद है।