नेपाल की कानून, न्याय तथा संसदीय कार्य मंत्री सोबिता गौतम ने देश में विधायी कार्यों की गति बढ़ाने और कानूनी रिक्तता को भरने के लिए अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता जाहिर की है। रविवार को प्रतिनिधि सभा की बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि संघीय संसद को आने वाले समय में एक प्रभावी कार्यस्थल के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां जनता की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाएगी।

सांसद डोलप्रसाद अर्याल को सभामुख पद पर निर्वाचित करने के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए मंत्री गौतम ने कहा कि संसद की भूमिका सरकार को जवाबदेह बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि अब संसद को अपनी पुरानी पहचान बदलकर एक 'सक्रिय और परिणामोन्मुखी' संस्था के रूप में स्थापित होना होगा।

मंत्री गौतम ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि शासन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए निर्णय लेने का साहस दिखाना अनिवार्य है। उन्होंने 'देरी करने की संस्कृति' को तोड़ने का आह्वान करते हुए विश्वास दिलाया कि कानून मंत्री के रूप में वह सरकार और संसद के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेंगी ताकि कानून निर्माण की प्रक्रिया में कोई बाधा न आए। उनके अनुसार, जनता की समस्याओं के समाधान के लिए कानूनों का समय पर निर्माण होना आवश्यक है और इसमें अब और विलंब की कोई गुंजाइश नहीं है।

भविष्य में संसद की प्रभावकारिता और सरकार की कार्यप्रणाली में आने वाले सुधार अब इन्हीं विधायी प्रयासों की गति पर निर्भर करेंगे।