कृषि, पशुपंक्षी विकास, वन एवं पर्यावरण मंत्री गीता चौधरी ने स्पष्ट किया है कि जलवायु परिवर्तन अब मात्र पर्यावरण तक सीमित न रहकर एक गहरे आर्थिक और सामाजिक संकट में बदल चुका है। काठमांडू में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने जोर देकर कहा कि नेपाल जैसे देश, जिनका वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में नगण्य योगदान है, वे भी इस संकट के विनाशकारी प्रभाव झेलने को मजबूर हैं।

मंत्री चौधरी ने ग्लेशियरों के पिघलने, बेमौसम की बरसात, भीषण बाढ़ और सूखे जैसी समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये आपदाएं देश की विकास यात्रा और आम जनजीवन में गंभीर बाधाएं उत्पन्न कर रही हैं। उन्होंने जानकारी दी कि नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के अनुरूप अपना 'राष्ट्रीय निर्धारित योगदान' (एनडीसी) तो तैयार कर लिया है, लेकिन अब इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि इसे जमीन पर कितनी प्रभावकारिता के साथ लागू किया जाता है।

संकट के स्थायी समाधान के लिए उन्होंने सरकार के तीनों स्तरों, निजी क्षेत्र, नागरिक समाज और मीडिया के बीच मजबूत तालमेल को अनिवार्य बताया। नेपाल द्वारा वन और जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में हासिल की गई अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। मंत्री ने भविष्य की दिशा तय करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए सभी हितधारकों को अपनी भूमिका का निर्वहन पूरी जिम्मेदारी से करना होगा।