नेपाल ने पिछले एक साल में प्राकृतिक और मानव जनित आपदाओं का एक विनाशकारी दौर देखा है, जिसने लगभग 500 लोगों की जान ले ली है और पूरे देश में हजारों परिवारों की आजीविका को भारी नुकसान पहुंचाया है। यह गंभीर मानवीय संकट नेपाल की भौगोलिक और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

गृह मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में देश भर में कुल 7,140 आपदा की घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों में 479 लोगों की दुखद मौत हो गई, जबकि 38 लोग अभी भी लापता हैं। इसके अलावा, 1,870 लोग घायल हुए हैं और कुल 12,994 परिवार इन घटनाओं से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। मौतों का सबसे बड़ा कारण आग लगने की घटनाएं रहीं, जहां 3,443 हादसों में 102 लोगों ने अपनी जान गंवाई। इसके बाद सर्पदंश से 98, भूस्खलन से 74, जानवरों के हमलों से 55 और बिजली गिरने से 47 लोगों की मौत हुई।

आपदाओं का यह सिलसिला अभी भी जारी है। प्राधिकरण की सबसे हालिया 24 घंटे की रिपोर्ट के मुताबिक, 30 जिलों में 36 नई घटनाएं घटी हैं। इस छोटी सी अवधि में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बीमारी (एल्टीट्यूड सिकनेस) के कारण एक व्यक्ति की मौत हो गई और मुख्य रूप से बिजली गिरने और आग लगने के कारण 14 अन्य घायल हो गए।

केवल इन 24 घंटों के भीतर, नेपाल को अनुमानित 30 लाख 86 हजार रुपये का भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है, और 30 मवेशियों की भी जान चली गई है। हालात से निपटने और राहत कार्य के लिए प्रभावित क्षेत्रों में 177 पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया था।

इन चिंताजनक आंकड़ों को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि भविष्य में इस तरह के भारी मानवीय और आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए नेपाल को अपने आपदा प्रबंधन ढांचे और चेतावनी प्रणालियों को और अधिक मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता है।