नेपाल में हाल ही में संपन्न हुए चुनावों के बाद बनने वाली नई सरकार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने दलित अधिकारों की रक्षा और जातीय भेदभाव को खत्म करने के लिए सख्त कदम उठाने का कड़ा निर्देश दिया है।
शनिवार को काठमांडू में 61वें अंतर्राष्ट्रीय रंगभेद और जातीय भेदभाव उन्मूलन दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए, आयोग के अध्यक्ष तप बहादुर मगर ने यह अहम बात कही। उन्होंने विजयी दल और आगामी सरकार को आगाह किया कि वे दलित समुदाय के अधिकारों के संवर्धन और संरक्षण के प्रति पूरी तरह से सचेत रहें, ताकि किसी भी स्तर पर उनके अधिकारों का हनन न हो।
मगर ने इस बात पर जोर दिया कि भेदभाव को जड़ से मिटाने के लिए केवल कानूनी प्रावधान कर देना ही काफी नहीं है। उन कानूनों को धरातल पर उतारने के लिए एक मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने दावा किया कि मानवाधिकार आयोग इस दिशा में सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर काम कर रहा है, लेकिन वास्तविक बदलाव तब तक नहीं आएगा जब तक नेपाली समाज की मानसिकता में बुनियादी परिवर्तन नहीं लाया जाता।
सत्ता हस्तांतरण के इस महत्वपूर्ण दौर में मानवाधिकार आयोग का यह स्पष्ट रुख इस बात का संकेत है कि नई सरकार के सामने सामाजिक न्याय और समानता स्थापित करना केवल एक कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि एक बड़ी राजनीतिक और सामाजिक चुनौती साबित होने वाला है।