नेपाल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) ने उन डॉक्टरों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से बिना किसी शारीरिक जांच के परामर्श देते हैं या दवाएं लिखते हैं। काउंसिल ने एक 'अत्यंत महत्वपूर्ण सूचना' जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि इंटरनेट के माध्यम से मनमाने ढंग से दी जाने वाली चिकित्सा सलाह पेशेवर नैतिकता के विरुद्ध है।
काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. सतीश कुमार देव द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, टिकटॉक, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे माध्यमों पर बिना मरीज को देखे दवाएं बताना न केवल अवैज्ञानिक है, बल्कि यह मरीज के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा भी पैदा कर सकता है। काउंसिल ने इसे पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना कृत्य करार दिया है।
चिकित्सा आचार संहिता के उल्लंघन के अलावा, काउंसिल ने मरीजों की गोपनीयता को लेकर भी चिंता जताई है। डॉक्टरों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे मरीजों से संबंधित किसी भी वीडियो या सामग्री को साझा करते समय उनकी पहचान और चेहरा उजागर न करें। मरीज की निजता भंग करना कानूनन गलत माना जाएगा।
काउंसिल ने चेतावनी दी है कि जो भी चिकित्सक इन संवेदनशील नियमों की अनदेखी करेंगे, उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। स्वास्थ्य सेवा जैसे गंभीर क्षेत्र में पेशेवर मर्यादा बनाए रखना अनिवार्य है।
यह नया नियम डिजिटल मंचों पर डॉक्टरों की सक्रियता को विनियमित करने और मरीजों को गलत चिकित्सा परामर्श से बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।