नेपाल के राजनीतिक और प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की वकालत करते हुए राष्ट्रीय एकता दल ने सरकार के समक्ष अपने नीतिगत प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं। दल के केंद्रीय अध्यक्ष विनय यादव के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने संविधान संशोधन बहस पत्र तैयार करने वाले कार्यदल और प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद कार्यालय को अपना आधिकारिक सुझाव पत्र सौंपा। दल का मानना है कि देश की मौजूदा राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था में व्यापक सुधार की तत्काल आवश्यकता है।

सौंपे गए प्रस्ताव में नेपाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण रखने के लिए देश को "संघीय हिंदू गणतंत्र" घोषित करने की मांग प्रमुखता से की गई है। इसके साथ ही, देश की मूल सनातन परंपरा से इतर अन्य धर्मों को स्वीकार करने वाले व्यक्तियों को प्रमुख संवैधानिक पदों के लिए अयोग्य घोषित करने का प्रावधान संविधान में शामिल करने की बात कही गई है। दल ने मौजूदा संविधान के तहत कार्यरत मुस्लिम आयोग को भी भंग करने का प्रस्ताव रखा है।

चुनाव प्रणाली में सुधार का खाका खींचते हुए दल ने सुझाव दिया है कि संघीय और प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों के निर्धारण में भूगोल के स्थान पर जनसंख्या को मुख्य आधार बनाया जाना चाहिए। स्थानीय निकायों को दलीय राजनीति के प्रभाव से मुक्त रखने के लिए स्थानीय चुनाव गैर-दलीय आधार पर कराने, वर्तमान मिश्रित चुनाव प्रणाली को पूरी तरह से प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली में बदलने और मधेसी, जनजाति, दलित तथा महिलाओं के लिए विशेष आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

राज्य के नीतिगत ढांचे में बदलाव की बात करते हुए राष्ट्रीय एकता दल ने प्रस्ताव दिया है कि उपराष्ट्रपति को स्वतः ही राष्ट्रीय सभा (उच्च सदन) की अध्यक्षता की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। साथ ही, राष्ट्रीय सभा के उपाध्यक्ष पद पर अनिवार्य रूप से भिन्न लिंग के सदस्य का चयन करने की संवैधानिक व्यवस्था की जानी चाहिए।

प्रांतीय व्यवस्था की समीक्षा करते हुए दल ने वर्तमान सात प्रांतों की संख्या को घटाकर अधिकतम पांच प्रांत करने का प्रस्ताव दिया है। इस योजना के अनुसार, देश में पूर्वी पहाड़ी, पूर्वी मधेस, पश्चिमी पहाड़ी और पश्चिमी मधेस प्रांत होने चाहिए, जबकि काठमांडू घाटी को केंद्र सरकार के सीधे नियंत्रण में एक विशेष केंद्र शासित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

प्रशासनिक अधिकारों के बंटवारे के तहत शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों को पूरी तरह से प्रांतीय सरकारों के अधिकार क्षेत्र में रखने, केवल प्रांतीय सरकारों को पुलिस बल परिचालन का अधिकार सौंपने और स्थानीय निकायों की निगरानी का जिम्मा भी प्रांतों को देने का सुझाव दिया गया है। प्रशासनिक खर्चों को कम करने के लिए जिला समन्वय समितियों को पूरी तरह से समाप्त करने की मांग की गई है।

वित्तीय मोर्चे पर, दल ने वर्तमान में 1 जुलाई (सावन 1) से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष को बदलकर 14 अप्रैल (वैशाख 1) से 13 अप्रैल (चैत्र मसान्त) तक करने का प्रस्ताव दिया है। दल का विश्वास है कि इस कदम से जून-जुलाई के महीने में होने वाले आनन-फानन के विकास कार्यों और बजट के दुरुपयोग की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।

राष्ट्रीय एकता दल के अनुसार, ये सुझाव नेपाल की मौलिक पहचान के संरक्षण, प्रशासनिक खर्चों में कटौती और प्रत्यक्ष लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में केंद्रित हैं। आगामी संविधान संशोधन की बहसों और नीतिगत निर्णयों में इन प्रस्तावों को कितनी गंभीरता से शामिल किया जाता है, यह देखना भविष्य के राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा।

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