26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ के एक महीने बाद, रसुवा जिले के उत्तरगया गांवपालिका में चल रहा राहत अभियान अब अल्पकालिक सहायता से आगे बढ़कर दीर्घकालिक पुनर्वास और पुनर्निर्माण की ओर स्थानांतरित हो गया है। सामुदायिक संस्था 'सानो पाइला' के नेतृत्व में जारी इस अभियान के तहत बोगटीटार में अब तक 7,500 से अधिक लोगों को भोजन कराया जा चुका है, जबकि 78 अति-संवेदनशील बच्चों को सेफ हाउस में आश्रय दिया गया है।
बीरगंज से राहत सामग्री लेकर 31 अगस्त को उत्तरगया पहुंचे दल ने स्थानीय प्रशासन के समन्वय से नीलकंठ माध्यमिक विद्यालय परिसर में कम्युनिटी किचन की शुरुआत की। क्षेत्र में पूरी तरह ठप बिजली व्यवस्था को देखते हुए संस्था ने अपने जनरेटर का उपयोग कर भोजन शाला, सुरक्षित आवास और ग्रामीणों के आवश्यक उपकरणों को चार्ज करने की सुविधा चालू रखी है। इसके साथ ही स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता और स्वास्थ्य पर भी निरंतर ध्यान दिया जा रहा है।
आपदा के कारण कई बच्चों के माता-पिता लापता हो गए या उनकी मृत्यु हो गई, जिससे बच्चों के शोषण और मानव तस्करी का जोखिम बढ़ गया था। बाल संरक्षण के क्षेत्र में दो दशकों के अनुभव का लाभ उठाते हुए सानो पाइला ने एक भवन को सेफ हाउस में बदलकर 78 बच्चों को सुरक्षित आश्रय, मनोसामाजिक परामर्श और प्रतिदिन 4 समय का पौष्टिक आहार देना शुरू किया।
स्थानीय गांवपालिका, राष्ट्रीय बाल अधिकार परिषद और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने सानो पाइला को उत्तरगया बाल संरक्षण क्लस्टर के सदस्य सचिव की जिम्मेदारी सौंपी है। इस भूमिका के तहत संस्था अब अनाथ और प्रभावित बच्चों का सटीक डेटा एकत्र कर दीर्घकालिक पुनर्वास योजना तैयार कर रही है, जिससे समुदाय को पुनर्निर्माण की दिशा में स्थायी रूप से सक्षम बनाया जा सके।