बुटवल: चुनाव नजदीक आते ही राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) के रूपन्देही–2 के उम्मीदवार सुलभ खरेल एक के बाद एक विवादों में घिरते जा रहे हैं। न्यायालय का अपमान करने से लेकर सहकारी पीड़ितों की अनदेखी करने के आरोप झेल रहे खरेल अब अपने चुनावी घोषणापत्र के कारण लोकप्रिय फेसबुक समूह “MRR Butwal” के साथ नए टकराव में आ गए हैं।

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वोट के लिए ‘MRR’ नाम का प्रयोग, संस्था की कड़ी आपत्ति

हाल ही में खरेल ने अपने चुनावी घोषणापत्र में यह पॉपुलिस्ट एजेंडा शामिल किया कि वे “MRR Butwal को भजन–कीर्तन के लिए संसाधन और आधारभूत संरचना उपलब्ध कराएंगे।” लेकिन एक विशुद्ध सामाजिक समूह को राजनीतिक रंग देने की कोशिश बताते हुए MRR Butwal ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।

संस्था से जुड़े एक सदस्य ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, “MRR Butwal के नाम का वोट के लिए उपयोग किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है।” इस विषय में न्यूज़ पोर्टल “नेपाल आज” ने खरेल से कई बार प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की, लेकिन वे टालते रहे। विवाद पर स्पष्ट जवाब देने के बजाय उन्होंने “इस विषय पर किसी भी हालत में न बोलने” का रुख अपनाया, जिससे उन पर नैतिक दबाव और बढ़ गया।

कौन हैं सुलभ खरेल? सोभिता गौतम कनेक्शन से लेकर रवि के बचाव तक

अमेरिका से कानून की पढ़ाई कर लौटे बताए जाने वाले अधिवक्ता खरेल, रास्वपा सभापति रवि लामिछाने से जुड़े सहकारी ठगी प्रकरण में लगातार और कड़ा बचाव करते रहे हैं।

हालांकि राजनीति में नए हैं, लेकिन रूपन्देही–2 जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र का टिकट उन्हें कैसे मिला, यह अपने आप में रहस्यमय माना गया। पार्टी के भीतर की चर्चाओं के अनुसार, रास्वपा की प्रभावशाली नेतृ सोभिता गौतम के साथ उनके निकट संबंध (मित्रता) के कारण उन्हें यह टिकट मिला।

सुलभ खरेल से जुड़े चार पुराने और गंभीर विवाद:

घोषणापत्र से जुड़े नए विवाद के अलावा उन पर ये आरोप भी लगे हैं:

1. आधी रात ‘टिकट हाइजैक’

रास्वपा ने शुरू में बालेन्द्र शाह (बालेन) के निकट माने जाने वाले आशीष सुवेदी को उम्मीदवार बनाकर बुटवल भेजा था। लेकिन प्रचार शुरू करने की उसी रात सुलभ खरेल ने कथित रूप से “पावर” लगाकर आधिकारिक टिकट अपने नाम कर लिया। इसके बाद स्थानीय कार्यकर्ता दो गुटों में बंट गए।

2. बालेन शाह का कथित ‘बहिष्कार’ और असहयोग

चर्चा है कि हाल ही में रास्वपा में शामिल हुए बालेन्द्र शाह (बालेन) ने खरेल को पूरा सहयोग नहीं दिया। बताया जाता है कि बालेन अन्य उम्मीदवारों को अपनी गाड़ी में लेकर क्षेत्र का दौरा करते रहे, लेकिन खरेल की उपेक्षा की। यह भी आरोप है कि बालेन गुट भीतर ही भीतर उनके खिलाफ काम कर रहा है।

3. सुप्रीम सहकारी पीड़ितों के प्रति कथित असंवेदनशीलता

बुटवल की सुप्रीम सहकारी में हजारों जमाकर्ताओं की लगभग 78 करोड़ 50 लाख रुपये की राशि के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। घर-घर अभियान के दौरान पीड़ितों ने उनसे स्पष्ट रुख मांगा, तो उन्होंने कथित रूप से कहा, “चुनाव के समय ऐसी बातें होती रहती हैं, यह मेरा सरोकार नहीं है,” और विषय से बच निकले। आलोचकों का कहना है कि एक ओर वे रवि के सहकारी मामले का बचाव करते हैं और दूसरी ओर अपने ही क्षेत्र के पीड़ितों की अनदेखी करते हैं।

4. न्यायालय का अपमान और अदालत में बेहोश होने की घटना

सर्वोच्च अदालत और बार परिसर में आगजनी के समय उन्होंने फेसबुक पर लिखा था: “जब न्यायालय जलता है, मेरा मन जरा भी नहीं रोया। मुझे वहां शेर बहादुर और केपी ओली के चेहरे दिखते हैं; ये न्यायाधीश संवैधानिक चोर हैं।” बाद में जब वे उसी अदालत की संवैधानिक पीठ में बहस करने पहुंचे, तो न्यायाधीशों ने उसी पोस्ट को लेकर उन्हें कठोर टिप्पणी की। दबाव में वे कथित रूप से अदालत कक्ष में ही बेहोश हो गए।

निष्कर्ष

“सुशासन” और “नई राजनीति” का नारा देने वाली पार्टी के उम्मीदवार पर धार्मिक/सामाजिक संस्था के नाम के दुरुपयोग से लेकर न्यायालय के अपमान और सहकारी पीड़ितों की अनदेखी जैसे लगातार विवादों के आरोप लगने से रूपन्देही–2 का चुनाव और अधिक जटिल होता जा रहा है।