तातोपानी सीमा नाके के संचालन में जारी अनिश्चितता के कारण नेपाली आयातकों और आम उपभोक्ताओं को भारी वित्तीय क्षति का सामना करना पड़ रहा है। चीनी अधिकारियों द्वारा नेपाल की ओर खराब सड़क स्थिति का हवाला देकर सीमा व्यापार रोके जाने पर स्थानीय तकनीकी अधिकारियों ने सवाल उठाए हैं।

सड़क डिभिजन कार्यालय चरिकोट के प्रमुख इंजीनियर नारायणदत्त भंडारी के अनुसार, नेपाल की सीमा क्षेत्र में गाड़ियों की आवाजाही रोकने जैसी कोई बड़ी भौगोलिक या तकनीकी समस्या मौजूद नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यद्यपि कुछ स्थानों पर रखरखाव की आवश्यकता है, लेकिन यह नाका पूरी तरह बंद रखने का पर्याप्त कारण नहीं हो सकता।

नाका बंद रहने से चीनी क्षेत्र में बड़ी संख्या में मालवाहक कंटेनर फंसे हुए हैं। इसके परिणामस्वरूप नेपाली व्यापारियों की लॉजिस्टिक्स लागत, गोदाम भाड़ा और बैंकिंग ब्याज में बेतहाशा बढ़ोतरी हो रही है। त्यौहारों के समय आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से बाजार में दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतें बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

वर्ष 1967 में चीनी सहायता से निर्मित अरनिको राजमार्ग नेपाल और तिब्बत के बीच व्यापार का मुख्य जरिया रहा है। यद्यपि यह मार्ग प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील है, फिर भी स्पष्ट समय-सीमा और मापदंडों के बिना एकतरफा निलंबन से द्विपक्षीय व्यापार की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए दोनों देशों की तकनीकी टीमों द्वारा पारदर्शी संयुक्त निरीक्षण किया जाना आवश्यक है। इसके अलावा, उत्तरी सीमा पर व्यापारिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नेपाल को रसुवागढी और कोरला जैसे वैकल्पिक व्यापारिक मार्गों के बुनियादी ढांचे को तेजी से विकसित करना होगा।