अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग की नई रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में चीन में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति “विशेष रूप से गंभीर” बनी रही। रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न धार्मिक समुदायों पर राज्य का नियंत्रण और दबाव लगातार जारी है।
चार मार्च को जारी इस वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन में धार्मिक गतिविधियाँ कड़ी सरकारी निगरानी में संचालित होती हैं। जो धार्मिक नेता या समुदाय सरकारी ढाँचे के बाहर स्वतंत्र रूप से काम करने का प्रयास करते हैं, उन्हें कई प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।
रिपोर्ट के अनुसार इस कार्रवाई का असर कई समुदायों पर पड़ा है, जिनमें शिनजियांग के उइगर मुस्लिम, फालुन गोंग साधक, तिब्बती बौद्ध, भूमिगत कैथोलिक समूह और स्वतंत्र प्रोटेस्टेंट चर्च शामिल हैं।
आयोग के उपाध्यक्ष आसिफ महमूद ने कहा कि सरकारी नियंत्रण से बाहर रहने वाले धार्मिक संगठनों पर दबाव और बढ़ा है। आयुक्त मॉरीन फर्ग्युसन ने इस कार्रवाई को व्यापक और व्यवस्थित बताया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकारी मान्यता से बाहर चलने वाले प्रोटेस्टेंट हाउस चर्चों पर कार्रवाई जारी है। सियोन चर्च के संस्थापक एज्रा जिन का मामला भी अधिकार संगठनों के बीच चर्चा में रहा है।
फालुन गोंग साधकों के खिलाफ लंबे समय से जारी कार्रवाई का भी रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है। कुछ मामलों में बुजुर्ग व्यक्तियों को भी जेल की सजा दिए जाने की जानकारी दी गई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन से बाहर रहने वाले धार्मिक समुदायों पर निगरानी और दबाव बढ़ाने के प्रयासों के आरोप सामने आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा आने वाले अंतरराष्ट्रीय संवादों में महत्वपूर्ण बना रह सकता है।