पूर्वी एशिया के सामरिक परिदृश्य में चीन द्वारा ताइवान के इर्द-गिर्द बढ़ाई गई सैन्य हलचल ने क्षेत्रीय सुरक्षा को एक नए जोखिम में डाल दिया है। नवंबर 2026 के शुरुआती दिनों में ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने 24 घंटों के भीतर 49 चीनी सैन्य विमानों की गतिविधियों की पुष्टि की, जो इस साल का एक दिवसीय उच्चतम आंकड़ा है। इनमें से 31 विमानों ने ताइवान जलडमरूमध्य की मध्य रेखा को पार किया अथवा ताइवान के वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (एडीआईजेड) में प्रवेश किया।

उसी दौरान पश्चिमी प्रशांत महासागर में चीन के विमान वाहक पोत 'लियाओनिंग' के नेतृत्व में 100 से अधिक नौसैनिक और तटरक्षक पोत सक्रिय रहे। यद्यपि अगले दिन सुबह विमानों की संख्या घटकर 22 रह गई, लेकिन समुद्र में विशाल सैन्य तैनाती बनी रही। बिना किसी औपचारिक सैन्य अभ्यास की घोषणा किए कई मोर्चों पर दबाव बनाने की बेजिंग की यह नीति क्षेत्र में निरंतर सैन्य मौजूदगी को एक सामान्य घटनाक्रम बनाने का प्रयास मानी जा रही है।

यह घटनाक्रम अगस्त 2022 में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की तत्कालीन अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी की ताइपे यात्रा के बाद से चीन द्वारा अपनाई जा रही रणनीति का ही विस्तार है। चीन की इस गतिविधि का असर जापान और फिलीपींस पर भी पड़ रहा है। अक्टूबर 2026 में जापान ने ओसुमी जलडमरूमध्य से गुजरते चीनी युद्धपोतों को ट्रैक किया था, जबकि नवंबर की शुरुआत में ताइवान-प्रशासित प्राटास द्वीप समूह के समीप चीनी तटरक्षक पोत का प्रवेश 2026 की 13वीं ऐसी घटना दर्ज की गई।

वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति और प्रमुख समुद्री व्यापारिक मार्गों के केंद्र में स्थित ताइवान के आसपास जारी यह हलचल अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। ताइवान और उसके पड़ोसी देशों के लिए असली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि नियमित होती यह सैन्य गतिविधियां किसी अप्रत्याशित हादसे या बड़े टकराव का रूप न ले लें।