नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ (एफएनसीसीआई) के आगामी चुनाव से पहले निजी क्षेत्र की राजनीति में उस वक्त उबाल आ गया, जब वर्तमान अध्यक्ष चंद्र प्रसाद ढकाल ने अपने उत्तराधिकारी अंजन श्रेष्ठ के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। अगले सप्ताह होने वाले मतदान के लिए चल रही तैयारियों के बीच ढकाल ने वरिष्ठ उपाध्यक्ष (जो स्वतः अगले अध्यक्ष होंगे) अंजन श्रेष्ठ को चेतावनी दी कि वे चुनावी गुटबाजी से दूर रहें। ढकाल ने आरोप लगाया कि श्रेष्ठ ने पर्दे के पीछे से अपना पैनल तैयार किया है और वे प्रचार अभियान में सक्रिय हैं, जो महासंघ के विधान की भावना के विपरीत है।
ढकाल के अनुसार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष को स्वतः अध्यक्ष बनाने की व्यवस्था इसलिए की गई थी ताकि नेतृत्व विवादरहित और तटस्थ रहे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भावी अध्यक्ष खुद पम्प्लेट छपवाकर किसी एक समूह का पक्ष लेंगे, तो संस्था की निष्पक्षता कैसे बनी रहेगी। ढकाल ने स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है कि यदि श्रेष्ठ ने गुटबाजी बंद नहीं की, तो वे भी अपनी तटस्थता तोड़ देंगे और दूसरे पक्ष के समर्थन में खुलकर मैदान में उतरेंगे। यह टकराव महासंघ के भीतर आंतरिक लोकतंत्र और भविष्य के नेतृत्व पर संशय पैदा कर रहा है।
अपने तीन साल के कार्यकाल की सफलताओं का जिक्र करते हुए ढकाल ने कहा कि एक शक्तिशाली सरकार के सामने निजी क्षेत्र का विभाजित होना दुर्भाग्यपूर्ण होगा। उन्होंने जोर दिया कि महासंघ की शक्ति उसकी एकता में निहित है और गुटबाजी से सरकार के साथ मोलभाव करने की क्षमता कमजोर होती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अंजन श्रेष्ठ अपनी रणनीति बदलेंगे या महासंघ के दो सबसे बड़े नेताओं के बीच प्रतिष्ठा की यह लड़ाई एक नया मोड़ लेगी।