नेपाल की बालेन शाह सरकार द्वारा सीमा पर लागू किए गए नए नियमों और करों ने भारतीय सीमावर्ती बाजारों की कमर तोड़ दी है। भारत से आयात होने वाले सामानों पर सख्ती और कड़ी सुरक्षा के कारण रूपईडीहा, बाबागंज और नानपारा जैसे व्यापारिक केंद्रों में ग्राहकों का अकाल पड़ गया है।
प्रशासन के नए आदेश के अनुसार, अब 100 नेपाली रुपये (लगभग 62 भारतीय रुपये) से अधिक मूल्य के किसी भी सामान पर नेपाल भन्सार शुल्क देना अनिवार्य है। इस छोटे से शुल्क के कारण उन नेपाली नागरिकों ने सीमा पार करना कम कर दिया है, जो पहले अपनी दैनिक जरूरतों जैसे सब्जी, दाल, चावल और कपड़ों के लिए भारतीय बाजारों पर निर्भर थे।
हिंदुस्थान समाचार की रिपोर्ट के मुताबिक, सीमावर्ती व्यापारियों का कहना है कि व्यापार में 40 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। कपड़ा विक्रेता दानिश फरमान रजा ने बताया कि जो बाजार पहले ग्राहकों से गुलजार रहते थे, वे अब सुनसान पड़े हैं। सुबह दुकान खोलने के बाद ग्राहकों के लिए शाम तक इंतजार करना पड़ता है।
जूता व्यवसायी अब्दुल सलाम और किराना दुकानदार आसिफ सिद्दीकी ने भी इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार, अब नेपाली नागरिक केवल घूमने के उद्देश्य से आते हैं, खरीदारी में उनकी रुचि लगभग खत्म हो गई है। भन्सार शुल्क के डर से लोग सामान खरीदने से बच रहे हैं, जिससे बिक्री पूरी तरह से ठप हो गई है।
नेपाल सरकार के इस कड़े रुख और राजस्व संरक्षण की नीति ने सीमावर्ती व्यापारिक समीकरणों को पूरी तरह से बदल दिया है, जिसका भविष्य में और भी गहरा असर देखने को मिल सकता है।