आगामी 25 अप्रैल को दुनिया भर के तिब्बती और उनके समर्थक गेधुन चोकी न्यिमा का जन्मदिन मनाएंगे, जिन्हें 11वें पंचेन लामा के रूप में जाना जाता है। महज छह साल की उम्र में मई 1995 से लापता हुए न्यिमा का मामला आधुनिक इतिहास के सबसे पुराने और दुखद "जबरन गुमशुदगी" के मामलों में से एक बना हुआ है।
14वें दलाई लामा द्वारा पंचेन लामा के रूप में मान्यता दिए जाने के बाद से ही उनका कोई अता-पता नहीं है। तिब्बती समाज के लिए यह केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि उनकी धार्मिक स्वतंत्रता और तिब्बती बौद्ध धर्म की अखंडता पर एक बड़ा आघात माना जाता है।
इस अवसर पर लंदन के प्लमस्टेड स्थित पाल्युल सेंटर में तिब्बती समुदाय द्वारा एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक चलने वाले इस आयोजन में प्रार्थनाओं के साथ-साथ विचार-विमर्श भी किया जाएगा। इस दौरान दलाई लामा की प्रतिनिधि छेरिंग यांगकी और समुदाय के अध्यक्ष फुंतसोक नोर्बु अपने विचार साझा करेंगे।
टाशी ल्हुनपो यूके ट्रस्ट के ट्रस्टी माइकल व्हाइटवुड भी इस सभा को संबोधित करेंगे। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पंचेन लामा का मुद्दा वैश्विक कूटनीति के पन्नों में कहीं खो न जाए। निर्वासन में रहने के बावजूद, तिब्बती अपनी आध्यात्मिक परंपराओं को पूरी गरिमा के साथ सुरक्षित रखने के लिए संकल्पित हैं।
तीन दशकों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पंचेन लामा की स्थिति को लेकर बनी अनिश्चितता अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों के लिए चिंता का विषय है। यह आयोजन एक बार फिर उनकी सुरक्षा और मानवाधिकारों के प्रति वैश्विक जिम्मेदारी को रेखांकित करता है।