उम्र बढ़ने के साथ अपने मस्तिष्क को संज्ञानात्मक गिरावट और अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए बुजुर्गों को भारी कसरत करने की आवश्यकता नहीं है। अल्जाइमर्स रिसर्च एंड थेरेपी पत्रिका में प्रकाशित एक हालिया शोध के अनुसार, केवल दस मिनट तक लगातार किया गया हल्का व्यायाम भी वृद्ध लोगों के मस्तिष्क को गहरे सुरक्षात्मक लाभ प्रदान करता है।

एएलजेडइंफो डॉट ओआरजी की रिपोर्ट के मुताबिक, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सैन फ्रांसिस्को (UCSF) के शोधकर्ताओं ने ब्रांच (BrANCH) अध्ययन के तहत यह अहम जानकारी जुटाई है। इस शोध में सैन फ्रांसिस्को क्षेत्र के 279 ऐसे बुजुर्गों को शामिल किया गया था, जिनकी औसत आयु 72 वर्ष थी और जिन्हें भूलने की कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। पूरे एक महीने तक इन प्रतिभागियों की कलाई पर फिटबिट गतिविधि मॉनिटर बांधकर उनके हर मिनट के मूवमेंट को रिकॉर्ड किया गया और साथ ही एमआरआई स्कैन के जरिए उनके दिमाग की जांच की गई।

शोध के नतीजे बताते हैं कि दिन भर में सामान्य रूप से कदम चलने और लगातार व्यायाम करने में बड़ा अंतर है। हालांकि व्यायाम करने वाले और न करने वाले, दोनों समूहों ने औसतन प्रतिदिन 6,000 कदम चले, लेकिन मस्तिष्क के स्वास्थ्य में सुधार केवल उन लोगों में देखा गया जिन्होंने कम से कम 10 मिनट तक बिना रुके (न्यूनतम 40 कदम प्रति मिनट की गति से) सैर की। ऐसे बुजुर्गों के मस्तिष्क के व्हाइट मैटर में घाव या असामान्य धब्बे काफी कम पाए गए, जो सीधे तौर पर संज्ञानात्मक गिरावट से जुड़े होते हैं।

इसके अलावा, जो लोग नियमित रूप से यह छोटी अवधि का व्यायाम करते थे, उनका एग्जीक्यूटिव फंक्शन यानी योजना बनाने, निर्णय लेने और चीजों को व्यवस्थित करने की क्षमता उन लोगों की तुलना में बहुत बेहतर थी जो निष्क्रिय जीवन जीते थे। औसतन, इन सक्रिय प्रतिभागियों ने सप्ताह में चार बार लगभग 25 मिनट तक व्यायाम किया।

अध्ययन के लेखकों ने इस बात पर जोर दिया है कि पूरी तरह से निष्क्रिय रहने की तुलना में कोई भी शारीरिक गतिविधि बेहतर है। जैसे-जैसे उम्र के साथ मस्तिष्क में होने वाले बदलावों को लेकर वैज्ञानिक समझ बढ़ रही है, यह शोध भविष्य में मानसिक स्वास्थ्य को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए एक बेहद आसान और प्रभावी उपाय साबित होगा।