सुनसरी के भूमि सुधार एवं मालपोत कार्यालय में पिछले दो दिनों से सन्नाटा पसरा हुआ है। पुलिस छापेमारी के दौरान गिरफ्तार किए गए अपने साथियों की रिहाई की मांग को लेकर निजी भू-सेवा केंद्रों और लेखापढ़ी व्यवसायियों ने काम बंद कर दिया है। इस हड़ताल के कारण कार्यालय में होने वाला दैनिक लगभग 1 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह पूरी तरह रुक गया है, जिससे सरकारी खजाने को भारी चपत लग रही है।
प्रशासनिक स्तर पर की गई निगरानी के दौरान सार्वजनिक सेवा में बाधा डालने के आरोप में पुलिस ने सुनसरी मालपोत और इटहरी यातायात कार्यालय से कुल 18 लोगों को हिरासत में लिया था। अदालत ने इन सभी को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। इसी कार्रवाई के विरोध में इनरुवा मालपोत से जुड़े सेवा केंद्रों ने अपनी सेवाएं स्थगित कर दी हैं। कार्यालय के पास अपना स्वयं का सेवा डेस्क न होने के कारण पूरी सरकारी मशीनरी इन निजी फर्मों पर निर्भर है, जिसका खामियाजा अब आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
काम के सिलसिले में कार्यालय पहुंचने वाले सेवाग्राही घंटों इंतजार करने के बाद खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं। सरकारी कर्मचारियों के पास करने को कोई काम नहीं है क्योंकि डेटा एंट्री और ऑनलाइन प्रक्रिया निजी केंद्रों के माध्यम से ही संचालित होती है। इस विवाद ने सरकारी सेवाओं के निजीकरण और आपातकालीन स्थितियों के लिए बैकअप योजना की कमी को उजागर कर दिया है।
फिलहाल, प्रदर्शनकारी व्यवसायी अपनी मांग पर अड़े हुए हैं और पुलिस कानूनी प्रक्रिया का हवाला दे रही है। यदि यह गतिरोध जल्द ही समाप्त नहीं हुआ, तो भूमि संबंधी महत्वपूर्ण लेनदेन और सरकारी राजस्व पर इसका दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ना तय है।