चीन में तेजी से घटती जन्मदर के बीच सरकार ने ऑनलाइन अभिव्यक्ति पर नियंत्रण और सख्त कर दिया है। फरवरी 2026 में मनाए गए लूनर नववर्ष के दौरान विवाह और बच्चों को लेकर उठने वाली आलोचनात्मक चर्चाओं को सीमित करने के लिए नया सेंसरशिप अभियान शुरू किया गया।
12 फरवरी को चीन के शीर्ष इंटरनेट नियामक साइबरस्पेस एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ चाइना ने एक महीने तक चलने वाला ऑनलाइन अभियान घोषित किया। नियामक ने कहा कि इसका उद्देश्य इंटरनेट पर “उत्सवपूर्ण, शांतिपूर्ण और सकारात्मक वातावरण” बनाए रखना है।
निर्देश के अनुसार डिजिटल प्लेटफॉर्मों को ऐसे पोस्ट हटाने होंगे जो विवाह न करने या बच्चों को जन्म न देने के विचार को बढ़ावा देते हैं। यह कदम उस समय उठाया गया जब लूनर नववर्ष के दौरान सोशल मीडिया पर पारिवारिक अपेक्षाओं और व्यक्तिगत जीवन से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा होती है।
इस अवधि में कंटेंट क्रिएटर, प्रभावशाली व्यक्तित्व और सामान्य उपयोगकर्ता अपने अनुभव साझा करते हैं और विवाह, करियर तथा जीवनशैली के दबावों पर खुलकर बात करते हैं। लगातार दूसरे वर्ष इन चर्चाओं को सरकारी सेंसरशिप के दायरे में लाया गया है।
नियामक के अनुसार प्लेटफॉर्मों को उन पोस्टों को पहचानकर हटाना होगा जो “नकारात्मक भावनाएँ भड़काते” हैं। इसमें विवाह और बच्चों के खिलाफ विचार, विवाह से डर या मातृत्व को लेकर चिंता बढ़ाने वाले संदेश तथा लैंगिक तनाव पैदा करने वाली सामग्री शामिल है।
अभियान का दायरा काफी व्यापक रखा गया है। इसमें एआई से तैयार सामग्री जिसे “डिजिटल कचरा” कहा गया है, ऑनलाइन विवाद, षड्यंत्र सिद्धांत, जुए, यौन सेवाओं या भविष्यवाणी से जुड़ी जानकारी भी शामिल है।
हालांकि परिवार से जुड़ी चर्चाओं पर विशेष जोर यह दिखाता है कि चीन में जनसांख्यिकीय संकट कितना गंभीर हो चुका है। इसी प्रकार की सामग्री को 2025 के लूनर नववर्ष अभियान में भी निशाना बनाया गया था।
राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार 2025 में चीन में केवल 7.92 मिलियन जन्म दर्ज किए गए। प्रति हजार आबादी पर 5.63 जन्मदर के साथ यह 1949 के बाद का सबसे निचला स्तर है।
2016 में एक-बच्चा नीति समाप्त होने के बाद पहले ही वर्ष में लगभग 18 मिलियन जन्म दर्ज हुए थे। लेकिन एक दशक से भी कम समय में यह संख्या आधे से भी कम रह गई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार चीन की कुल आबादी लगातार चौथे वर्ष घटकर 2025 में लगभग 1.4049 अरब रह गई।
जनसंख्या में गिरावट का असर श्रम बाजार, आर्थिक विकास, पेंशन प्रणाली और सामाजिक स्थिरता पर पड़ सकता है, इसलिए यह सरकार के लिए महत्वपूर्ण नीति चुनौती बन गया है।
दशकों तक चीन ने एक-बच्चा नीति के जरिए जनसंख्या को नियंत्रित किया था। 1980 के आसपास लागू हुई यह नीति 2015 में समाप्त कर दी गई। सरकार का दावा है कि इस नीति से लगभग 40 करोड़ जन्म रोके गए।
नीति समाप्त होने के बाद सरकार ने जन्मदर बढ़ाने के लिए कई प्रोत्साहन योजनाएँ शुरू की हैं। 2025 में राष्ट्रीय स्तर पर मुफ्त प्री-स्कूल शिक्षा कार्यक्रम शुरू किया गया और तीन साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रति वर्ष लगभग 500 अमेरिकी डॉलर की सब्सिडी दी जा रही है।
दिसंबर 2025 में कर नीतियों में भी बदलाव किया गया। कंडोम और गर्भनिरोधक दवाओं पर मिलने वाली कर छूट समाप्त कर दी गई, जबकि विवाह सेवाओं, चाइल्डकेयर और मैचमेकिंग एजेंसियों को कर प्रोत्साहन दिया गया।
इन उपायों के बावजूद जन्मदर में गिरावट जारी है। ऐसे में सरकार ने सार्वजनिक विमर्श को नियंत्रित करना भी एक नीति उपकरण के रूप में अपनाना शुरू कर दिया है।
चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लंबे समय से ऐसे स्थान बन गए हैं जहाँ व्यक्तिगत चिंताएँ और सामाजिक वास्तविकताएँ एक साथ दिखाई देती हैं। घरों की कीमतें, नौकरी की असुरक्षा और जीवनशैली से जुड़ी बहसें अक्सर विवाह और बच्चों के निर्णय से जुड़ जाती हैं।
इन चर्चाओं को सीमित करने से सार्वजनिक संवाद का दायरा संकुचित होता दिखाई देता है। नियामकों ने ऐसे विचारों को सामाजिक विभाजन और भावनात्मक अस्थिरता से जोड़कर वर्गीकृत किया है।
साथ ही आधिकारिक जनसांख्यिकीय आंकड़ों की विश्वसनीयता पर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं, खासकर कोविड-19 महामारी के दौरान डेटा पारदर्शिता को लेकर हुई बहस के बाद।
चीन की आबादी लगातार घटती जा रही है और व्यक्तिगत विकल्प तथा सरकारी अपेक्षाओं के बीच दूरी साफ दिखाई दे रही है। ऐसे में यह स्पष्ट हो रहा है कि चीन में जनसंख्या नीति अब केवल आर्थिक प्रोत्साहनों का विषय नहीं रही, बल्कि सार्वजनिक विमर्श और अभिव्यक्ति के नियंत्रण से भी जुड़ गई है।