दुनिया की सबसे ऊंची चोटी, माउंट एवरेस्ट पर इस साल की चढ़ाई एक बड़े खतरे के कारण रुक गई है। खुम्बु आइसफॉल के ठीक ऊपर एक लगभग 100 फीट ऊंचा विशाल हिमखंड (सेराक) मार्ग को बाधित कर रहा है, जिससे आधार शिविर (बेस कैंप) पर सैकड़ों पर्वतारोही अपनी बारी का इंतजार करने को मजबूर हैं।
विशेषज्ञ 'आइसफॉल डॉक्टरों' के लिए यह हिमखंड एक बड़ी चुनौती बन गया है। इसके गिरने के डर से वे कैंप II तक सीढ़ियां और रस्सियां नहीं लगा पा रहे हैं। आमतौर पर अप्रैल के तीसरे सप्ताह तक खुलने वाला यह रास्ता इस बार प्राकृतिक बाधा के कारण अब तक बंद है।
पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यदि यह हिमखंड जल्द ही नहीं गिरता या पिघलता, तो वैकल्पिक रास्तों की तलाश के लिए अतिरिक्त शेरपाओं की मदद ली जाएगी। पर्वतारोहण दल के नेताओं ने बताया कि इस देरी से सामान की ढुलाई और पर्वतारोहियों के अनुकूलन (एक्लिमेटाइजेशन) का पूरा शेड्यूल बिगड़ गया है।
इस साल नेपाल ने 410 पर्वतारोहियों को परमिट जारी किए हैं, जिनमें सबसे बड़ी संख्या चीन, अमेरिका और भारत के नागरिकों की है। तिब्बत की ओर से रास्ता बंद होने के कारण नेपाल की तरफ पर्वतारोहियों का दबाव और भी बढ़ गया है।
पर्वतारोहण नेपाल की अर्थव्यवस्था और रोजगार का एक मुख्य आधार है। अब सबकी निगाहें मौसम और उस खतरनाक हिमखंड पर टिकी हैं, जिसका हटना ही एवरेस्ट फतह की राह आसान करेगा।