इस्लामाबाद – आतंकवाद के वित्तपोषण (Terror Financing) को रोकने के लिए पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे बड़े-बड़े दावों की हकीकत एक नई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट ने सामने ला दी है। जियोपॉलिटिकल मॉनिटर की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की कार्रवाई महज 'अनुपालन का भ्रम' (Illusion of Compliance) है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि इस्लामाबाद ने कानूनों में बदलाव तो किया है, लेकिन आतंकी गुटों तक पैसा पहुंचने के रास्ते अब भी खुले हुए हैं।

लंबे समय तक फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की निगरानी में रहने के बावजूद, पाकिस्तान ने केवल तकनीकी मानकों को पूरा करने पर जोर दिया है। रिपोर्ट का विश्लेषण बताता है कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे खतरनाक संगठनों का आर्थिक ढांचा पूरी तरह नष्ट नहीं हुआ है। कागजी सुधारों के पीछे, ये संगठन अब भी अपने वित्तीय नेटवर्क को चलाने में सक्षम हैं।

रिपोर्ट में उन तरीकों का भी खुलासा किया गया है जिनसे आतंकियों को फंड मिल रहा है। इसमें दान, एनजीओ (NGOs), मदरसा नेटवर्क और नकद लेनदेन प्रमुख हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि राजनीतिक संरक्षण और कमजोर अभियोजन प्रणाली के कारण दोषी अक्सर सजा से बच निकलते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि जमीनी स्तर पर सिस्टम में कोई ठोस बदलाव नहीं आया है।

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सुरक्षा विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान का यह दोहरा चरित्र पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए खतरा बन गया है। इसका असर सिर्फ भारत और अफगानिस्तान तक सीमित नहीं है, बल्कि रिपोर्ट में नेपाल जैसे देशों के लिए भी इसे एक दीर्घकालिक चुनौती बताया गया है, जहाँ सीमा पार से कट्टरपंथ और टेरर फंडिंग का जोखिम बढ़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह रिपोर्ट एक चेतावनी है। इसमें जोर दिया गया है कि पाकिस्तान पर केवल दिखावटी सुधारों के बजाय व्यावहारिक और परिणाम देने वाले कदम उठाने के लिए दबाव बनाना होगा। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो आतंकवाद के खिलाफ चल रही वैश्विक लड़ाई कमजोर पड़ सकती है।