नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार के हालिया प्रशासनिक एवं कूटनीतिक फैसलों पर सवाल उठाते हुए जेन-जी कार्यकर्ता अजय सोडारी ने तीखा हमला बोला है। रिपोर्टर्स क्लब नेपाल में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान सोडारी ने आरोप लगाया कि पुलिस संगठन, न्यायपालिका और राष्ट्रीय संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर सरकार गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपना रही है। उन्होंने अदालत से हस्तक्षेप करने और देश में स्थापित प्रशासनिक व्यवस्था की गरिमा बनाए रखने की अपील की।
बहाल वर्तमान पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) दानबहादुर कार्की के तबादले की प्रक्रिया पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सोडारी ने कहा कि सरकार ने कानून से परे पद बनाकर आईजीपी को हटाया है, जो एक तरह से अप्रत्यक्ष बर्खास्तगी है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ में किए गए इस फैसले को अदालत निश्चित रूप से सुधारेगी। इसके साथ ही उन्होंने गृह मंत्री सुधन गुरुंग को गृह प्रशासन चलाने में पूरी तरह से विफल करार दिया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सोडारी ने चर्चित 'इनम सपकोटा मामले' पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि सपकोटा कुमार बेन द्वारा संचालित हैं और असीम शाह व प्रधानमंत्री बालेन शाह के नजदीकी हैं। सोडारी के अनुसार, सरकार इस मामले का सहारा लेकर अदालत, पुलिस प्रशासन, सेना मुख्यालय और मुख्य राजनीतिक दलों पर दबाव बनाने का प्रयास कर रही है। वहीं, लुंबिनी विकास कोष की उपाध्यक्ष पद के लिए आनी छोइंग डोल्मा की योग्यता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि नागरिकता विवाद और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के चलते उन्हें खुद इस पद को ठुकरा देना चाहिए।
इसके अतिरिक्त, भारत दौरे के दौरान वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले द्वारा दिए गए बयान की कड़ी आलोचना करते हुए सोडारी ने इसे समर्पणकारी सोच बताया। उन्होंने कहा कि लिपुलेक, सुस्ता, कालापानी और 1950 की संधि जैसे मुद्दों पर बात करना भारत-विरोधी होना नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री बालेन शाह से मांग की कि यदि वे वास्तव में राष्ट्रवादी हैं तो वित्त मंत्री वाग्ले को तुरंत बर्खास्त करें और जेन-जी की भावनाओं के अनुरूप कार्य करें।
सरकार के इन विवादित फैसलों और बयानों को लेकर उठे राजनीतिक बवंडर के बीच अब सभी की निगाहें न्यायपालिका और सरकार के अगले कदमों पर टिकी हैं।