आयुष्मान खुराना और सारा अली खान अभिनीत बॉलीवुड कॉमेडी फिल्म 'उड़ता तीर' पर नेपाल में प्रदर्शन पर रोक लगाए जाने के बाद कूटनीतिक, राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है। नेपाल के केंद्रीय फिल्म सेंसर बोर्ड ने राष्ट्रीय चलचित्र ऐन, 2026 की धारा 8(3) का हवाला देते हुए फिल्म की वितरण कंपनी नेशनल सिने ग्रुप को प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। बोर्ड के अनुसार, फिल्म की विषयवस्तु भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को दर्शाती है, जिससे मित्र राष्ट्र पाकिस्तान के साथ नेपाल के संबंधों में खटास आ सकती है।
पूर्व समीक्षाओं के अनुसार, 'उड़ता तीर' एक विशुद्ध हास्य-व्यंग्य फिल्म है जिसमें आयुष्मान खुराना ने एक पाकिस्तानी जासूस की भूमिका निभाई है। एक दुर्घटना में याददाश्त खोने के बाद वह खुद को कट्टर भारतीय देशभक्त सैनिक मानने लगता है और इसके बाद उत्पन्न होने वाली 'कॉमेडी ऑफ एरर्स' के माध्यम से राजनीतिक परिस्थितियों और पाकिस्तानी सत्ता पर तंज कसा गया है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में हास्य-व्यंग्य के माध्यम से राजनीतिक परिवेश को प्रस्तुत करना पूरी तरह से स्वीकार्य और सामान्य माना जाता है। हालांकि, एक व्यंग्यात्मक फिल्म को कूटनीतिक संवेदनशीलता के नाम पर प्रतिबंधित करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सरकार के अनुदारवादी दृष्टिकोण को उजागर करता है।
इस फैसले ने वर्तमान प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की नीतियों और मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि काठमांडू महानगर पालिका का मेयर रहने के दौरान भी वे हिंदी फिल्मों के प्रदर्शन पर रोक लगाकर विवादों और सुर्खियों में आए थे। आगामी नवंबर 2026 के अंत में प्रधानमंत्री शाह भारत दौरे पर जाने वाले हैं। इतने महत्वपूर्ण कूटनीतिक दौरे की पूर्वसंध्या पर एक भारतीय फिल्म को प्रतिबंधित करके वे नई दिल्ली को क्या संदेश देना चाहते हैं? क्या यह उनके पुराने भारत-विरोधी रुख की निरंतरता है, या घरेलू राजनीति में तथाकथित 'राष्ट्रवादी' छवि बनाए रखने का प्रयास?
वर्तमान में समाज में उठ रहे गंभीर भू-राजनीतिक और सामाजिक सवालों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बुद्धिजीवियों और आलोचकों ने इस प्रतिबंध को बढ़ते 'भारत-विरोधी राष्ट्रवाद' की अभिव्यक्ति के रूप में देखना शुरू कर दिया है। यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि एक सामान्य बॉलीवुड कॉमेडी फिल्म से संबंध बिगड़ने के डर से नेपाल, पाकिस्तान के प्रति इतनी एकतरफा संवेदनशीलता और झुकाव क्यों दिखा रहा है? इस संदर्भ में, कुछ विश्लेषकों ने यह आशंका भी जताई है कि नेपाल के तराई और पहाड़ी इलाकों में कथित तौर पर बढ़ती कट्टरपंथी गतिविधियों और जनसांख्यिकीय बदलावों का ऐसे फैसलों पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है। क्या सरकार किसी विशेष वर्ग को संतुष्ट करने के दबाव में ऐसा सेंसरशिप लागू कर रही है, इस पर गंभीर बहस शुरू हो गई है।
लोकतंत्र की सुंदरता उसकी सहनशीलता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में निहित होती है। हास्य और व्यंग्य किसी भी मजबूत राष्ट्र की नींव को नहीं हिला सकते। 'उड़ता तीर' जैसी फिल्म को प्रतिबंधित करके सरकार भले ही कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने का दावा करे, लेकिन इसने नेपाल में वाक् स्वतंत्रता पर चोट पहुंचाई है। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के आगामी भारत दौरे से पहले उठाया गया यह कदम नेपाल में पनपते भू-राजनीतिक झुकाव और अनुदारवादी सेंसरशिप की प्रवृत्ति पर लंबे समय तक सवाल खड़े करता रहेगा।