काठमांडू — नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र साह आगामी 23 से 25 नवंबर (मंसिर 7 से 9 गते) तक भारत यात्रा पर जाएंगे। सरकारी सूत्रों के अनुसार, नेपाल की विशेष पहल पर भारत सरकार के साथ समन्वय करके इस यात्रा की समय-सारणी तय की गई है।

मुख्य एजेंडा: सीमा विवाद से लेकर जलविद्युत तक

यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच मुख्य रूप से निम्नलिखित विषयों पर चर्चा होने की संभावना है:

  • सीमा विवाद: प्रधानमंत्री साह ने इससे पहले संसद में सीमा मुद्दों पर अपनी बात रखी थी। इसके अलावा 'जेन जी' आंदोलन के दौरान सुगौली संधि जलाए जाने के चर्चित प्रसंग को देखते हुए इस बार सीमा विवाद को सुलझाने के लिए क्या रणनीति अपनाई जाएगी, इसे लेकर व्यापक उत्सुकता है।

  • बाढ़ आपदा और राहत समन्वय: भोटेकोशी बाढ़ के समय भारत ने नेपाल को सहायता प्रदान की थी। चूंकि नेपाल ऊपरी तटीय (अपर रिपेरियन) राष्ट्र है, इसलिए बाढ़ और प्राकृतिक आपदाएं नेपाल और भारत दोनों के लिए एक साझा समस्या के रूप में चर्चा का विषय बनेंगी।

  • जलविद्युत और ऊर्जा व्यापार: नेपाल में संचालित भारतीय जलविद्युत परियोजनाओं और दोनों देशों के बीच हो रहे बिजली व्यापार को अधिक सहज बनाने तथा इसका विस्तार करने पर बातचीत होगी।

कैसे तय हुई यात्रा? (पर्दे के पीछे की कूटनीति)

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने फिलहाल इस यात्रा के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। सूत्रों के अनुसार, कुछ समय पहले प्रधानमंत्री के मुख्य सलाहकार कुमार बेन्जेंकार (कुमार बेन) ने चुपचाप भारत पहुंचकर भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल से मुलाकात की थी। हालांकि, कुमार बेन और अजीत डोभाल के बीच हुई इस बैठक की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है। यह दावा किया जा रहा है कि यह यात्रा औपचारिक कूटनीतिक माध्यम (विदेश मंत्रालय) के बजाय मुख्य सलाहकार कुमार बेन की ही प्रत्यक्ष पहल पर तय हुई है।

प्रतिनिधिमंडल और आंतरिक राजनीतिक हलचल

प्रधानमंत्री के प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल होगा, यह विषय अभी तय नहीं हुआ है। यात्रा में विदेश मंत्री शिशिर खनाल या मुख्य सलाहकार कुमार बेन में से कोई एक या दोनों जा सकते हैं। अटकलें लगाई जा रही हैं कि यदि विदेश मंत्रालय की प्रत्यक्ष भागीदारी के बिना यात्रा तय होने की पुष्टि होती है, तो प्रधानमंत्री स्तर की यात्रा होने के बावजूद विदेश मंत्री इसमें शामिल नहीं भी हो सकते हैं। इस बीच, इससे पहले राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के अध्यक्ष रवि लामिछाने को भारत यात्रा के दौरान मिले उच्च स्तरीय सम्मान को लेकर राजनीतिक हलकों में तुलना शुरू हो गई है। चूंकि विदेश मंत्री खनाल को लामिछाने के निकट माना जाता है, इसलिए मंत्रालय को दरकिनार कर सलाहकार के माध्यम से यात्रा तय होने पर लामिछाने की क्या प्रतिक्रिया होगी और भारत प्रधानमंत्री साह का कैसा स्वागत-सत्कार करेगा, इसे उत्सुकता से देखा जा रहा है।

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