कई दिनों तक भोजन न करने से मानव शरीर में केवल चर्बी ही कम नहीं होती, बल्कि इसके गहरे जैविक प्रभाव भी पड़ते हैं। 'नेचर मेटाबॉलिज्म' पत्रिका में छपे एक अध्ययन के मुताबिक, लंबे समय तक उपवास रखने से मस्तिष्क, चयापचय (मेटाबॉलिज्म) और प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़े व्यापक बदलाव शुरू हो जाते हैं।

वैज्ञानिकों ने पाया कि उपवास के सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव तुरंत दिखाई नहीं देते हैं। क्वीन मेरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन और नॉर्वेजियन स्कूल ऑफ स्पोर्ट्स साइंसेज के शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि बिना भोजन के लगभग तीन दिन बीत जाने के बाद ही शरीर एक बिल्कुल अलग जैविक स्थिति में कदम रखता है।

इस निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए विशेषज्ञों ने सात दिनों तक सिर्फ पानी पर रहने वाले १२ स्वस्थ स्वयंसेवकों के रक्त के नमूनों की जांच की। अत्याधुनिक प्रोटीओमिक्स तकनीक के जरिए रक्त में मौजूद करीब ३,००० प्रोटीनों की निगरानी की गई, जिसमें से एक-तिहाई से अधिक प्रोटीनों में तीसरे दिन के बाद भारी बदलाव देखा गया।

अध्ययन के दौरान वालंटियर्स का वजन औसतन ५.७ किलोग्राम कम हुआ। जब उन्होंने दोबारा खाना शुरू किया, तो उनके शरीर के अंगों और मांसपेशियों का वजन वापस लौट आया, लेकिन कम हुई चर्बी काफी हद तक गायब ही रही। इससे स्पष्ट हुआ कि उपवास वजन घटाने में बेहद कारगर है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि इस खोज की मदद से भविष्य में ऐसी दवाएं या थैरेपी विकसित की जा सकती हैं, जो बिना भूखे रहे भी उपवास जैसा स्वास्थ्य लाभ दे सकेंगी। यह उन मरीजों के लिए बेहद मददगार साबित होगा जो बीमारी के कारण भूखे नहीं रह सकते।

हालांकि, वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक भूखा रहना जोखिम से खाली नहीं है। इससे शरीर में पानी की कमी, कमजोरी और कुछ मामलों में रक्त के थक्के जमने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए, मधुमेह और हृदय रोग जैसी पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों को बिना डॉक्टरी सलाह के ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

स्रोत: क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन