सन् 1959 के तिब्बती राष्ट्रीय विद्रोह की 67वीं वर्षगांठ लंदन में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से मनाई गई। इस अवसर पर तिब्बती समुदाय, ब्रिटिश राजनेताओं और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर तिब्बत के मुद्दे पर ध्यान आकर्षित किया।

कार्यक्रम की शुरुआत वूलविच टाउन हॉल में हुई, जहां तिब्बती राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शित कर तिब्बती लोगों के प्रति समर्थन व्यक्त किया गया। यह आयोजन ग्रीनविच तिब्बती एसोसिएशन और रॉयल बरो ऑफ ग्रीनविच के सहयोग से किया गया था। भवन मरम्मत कार्य के कारण औपचारिक ध्वजारोहण समारोह नहीं हो सका, लेकिन स्थानीय अधिकारियों ने तिब्बती समुदाय के सदस्यों का स्वागत किया।

इसके बाद प्रतिभागी डाउनिंग स्ट्रीट के निकट व्हाइटहॉल क्षेत्र में एक रैली के लिए एकत्र हुए। यहां वक्ताओं ने तिब्बत में मानवाधिकारों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए लोकतांत्रिक देशों से इस मुद्दे पर ध्यान देने की अपील की।

रैली के बाद प्रतिभागियों ने केंद्रीय लंदन में शांति मार्च किया, जो अंततः चीनी दूतावास के बाहर जाकर समाप्त हुआ। यहां तिब्बती, उइगर और हांगकांग के लोकतंत्र समर्थकों ने एकजुटता व्यक्त की।

दिनभर चले कार्यक्रम का समापन इंडियन वाईएमसीए में आयोजित स्मृति समारोह के साथ हुआ। कार्यक्रम में प्रार्थना, मौन श्रद्धांजलि और 1959 के विद्रोह में बलिदान देने वालों को याद किया गया।

वक्ताओं ने तिब्बती भाषा, संस्कृति और पहचान की रक्षा के महत्व पर जोर दिया तथा वैश्विक समर्थन की आवश्यकता को रेखांकित किया। आयोजकों का कहना है कि ऐसे आयोजन तिब्बत के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।