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श्रेणी: विचार
अब क्या होगा?
नारायण मानन्धर “अब क्या होगा?” — यह सवाल आज हर नेपाली के सिर पर मंडरा रहा है। तुलनात्मक रूप से युवा सांसद, संसद में नई ऊर्जा, एक ही पार्टी के पास लगभग दो-तिहाई बहुमत, और बुज़ुर्ग...
ओली के साथ क्या समस्या है?
नारायण मानन्धर जेन–ज़ेड आंदोलन के बाद नेकपा (एमाले) के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली अचानक मेरे लिए एक प्रकार के नायक बन गए हैं। मैंने उन्हें नेपाली राजनीति का “ब्रूस ली” तक कह दिया था,...
तिब्बत के लिए ही नहीं, दुनिया के लिए भी क्यों महत्वपूर्ण है 10 मार्च
त्सेरिंग पासांगसंस्थापक–अध्यक्ष, ग्लोबल एलायंस फॉर तिब्बत एंड पर्सिक्यूटेड माइनॉरिटीज 10 मार्च तिब्बतियों के लिए केवल एक सालगिरह नहीं है। यह राष्ट्रीय स्मरण, राजनीतिक संकल्प और वै...
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अप्रत्याशित की भविष्यवाणी
यह चुनावों पर मेरी चौथी टिप्पणी है, जिसे मैंने “अप्रत्याशित की भविष्यवाणी” शीर्षक दिया है। तो क्या सभी विश्लेषण, पूर्वानुमान और भविष्यवाणियाँ गलत साबित हुईं? परिणाम साफ दिखाते हैं...
रास्वपा की ऐतिहासिक जीत यह दर्शाती है: कांग्रेस को बदलाव की आवश्यकता है, अन्यथा पुराने दलों का पतन निश्चित है
अपेक्षाओं का अर्थतंत्र जब हम बच्चे थे, तो घर आने वाले रिश्तेदारों से चॉकलेट की उम्मीद करना एक छोटी, मासूम सामाजिक रस्म हुआ करती थी। वर्षों बाद, अपने बीसवें दशक के मध्य में, मैं अप...
राजनीतिक दल और भ्रष्टाचार विरोधी एजेंडा
आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक दलों ने सुशासन और भ्रष्टाचार विरोध (GGAC) को विशेष महत्व दिया है। Gen-Z आंदोलन के बाद यह मुद्दा अधिक चर्चित बन गया है। इस आंदोलन की दो...
नेपाल की राजनीति में क्या समस्या है?
इटली के दार्शनिक एंटोनियो ग्राम्शी ने “इंटररेग्नम” (interregnum) या संक्रमणकाल को ऐसी स्थिति के रूप में परिभाषित किया था जहाँ “पुराना मर रहा होता है और नया जन्म नहीं ले पाता;...
ल्हासा से निर्वासन तक: नगारी रिनपोछे (१९४६–२०२६) का जीवन और विरासत
उत्तरी भारत के धर्मशाला स्थित कश्मीर कॉटेज में १७ फरवरी २०२६ को १६वें नगारी रिनपोछे तेंदज़िन छोएग्याल के निधन के बाद तिब्बती समुदाय गहरे शोक में है। १४वें दलाई लामा के सबसे छ...
अप्रत्याशित का पूर्वानुमान
आगामी चुनावों पर यह मेरा दूसरा विश्लेषण है। इससे पहले मैंने तीन संभावित परिदृश्य—सबसे खराब, यथास्थिति और सर्वोत्तम—प्रस्तुत किए थे (2 फरवरी, विचार लेख)। मेरी अपनी भविष्यवाणी...
कार्की रिपोर्ट और 'कैच-22'की स्थिति
नारायण मानन्धर इससे पहले मैंने लिखा था कि कार्की जांच आयोग की अध्ययन रिपोर्ट सुशीला कार्की सरकार के लिए 'गले की हड्डी' साबित होगी (6 फरवरी का ऑप-एड)। 11 फरवरी को समाप्त हुए आयोग क...
ओली की बड़ी दुविधा
नेपाली राजनीति में पीढ़ियों के बीच शक्ति-संतुलन का टकराव अब खुलकर दिखाई देने लगा है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को केंद्र में रखकर लिखे गए विश्लेषणात्मक लेख में नेतृत्व, प्र...