नेपाली सिनेमा जगत की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘लालीबजार’ के प्रदर्शन पर कानूनी संकट गहरा गया है। पाटन उच्च न्यायालय ने एक अहम आदेश जारी करते हुए इस फिल्म की स्क्रीनिंग पर फिलहाल के लिए रोक लगा दी है।
न्यायाधीश प्रकाश ढुंगाना की एकल पीठ ने आदेश दिया है कि आगामी 5 मई (22 वैशाख) तक फिल्म का प्रदर्शन नहीं किया जाए। अदालत के सूचना अधिकारी गोविंद प्रसाद कोइराला ने बताया कि वादी समुदाय की प्रतिनिधि रोशनी नेपाली द्वारा दायर याचिका पर यह फैसला लिया गया है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि फिल्म में कुछ ऐसे शब्दों और संवादों का इस्तेमाल किया गया है जो वादी समुदाय की भावनाओं और सम्मान को आहत करते हैं। यह फिल्म विशेष रूप से वादी समुदाय की महिलाओं के संघर्षों और उनके जीवन के सामाजिक पहलुओं पर आधारित है।
दिलचस्प बात यह है कि अदालत के इस आदेश से ठीक एक दिन पहले केंद्रीय फिल्म सेंसर बोर्ड ने फिल्म को सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए ‘यूनिवर्सल’ प्रमाणपत्र दे दिया था। यम थापा के निर्देशन में बनी और षट्कोण आर्ट्स द्वारा निर्मित यह फिल्म 30 अप्रैल को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली थी।
अब फिल्म का भविष्य अदालत की अगली सुनवाई पर निर्भर करेगा। 5 मई को होने वाली चर्चा के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि फिल्म अपने मूल रूप में रिलीज होगी या इसमें कुछ बदलाव करने होंगे।