लुंबिनी विकास ट्रस्ट के सदस्य सचिव पद पर बुनियादी ढांचा विकास मंत्री सुनील लम्साल के सचिवालय सलाहकार संतोष पांडे की नियुक्ति के बाद सरकारी पारदर्शिता और मेरिटोक्रेसी की स्थिति पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
ट्रस्ट के कार्यकारी पद के लिए निर्धारित खुली प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के अंतर्गत 209 पात्र नागरिकों ने नियमानुसार अपने आवेदन जमा किए थे। हालांकि, जारी चयन प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए, बिना आवेदन दिए और किसी भी चयन प्रक्रिया में शामिल हुए बिना ही पांडे को सीधे सदस्य सचिव की जिम्मेदारी सौंप दी गई।
इस प्रशासनिक निर्णय पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कार्यकर्ता अजय सोडारी ने कहा कि सरकार ने स्वयं द्वारा तय किए गए मेरिटोक्रेसी यानी खुली प्रतिस्पर्धा के सिद्धांतों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया है। उन्होंने रेखांकित किया कि योग्य नागरिक औपचारिक प्रक्रिया के तहत कतार में लगे रहते हैं, जबकि राजनीतिक पहुंच रखने वाले लोग सीधे पदों पर आसीन हो जाते हैं, जो कानून के शासन पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
प्रशासनिक नियमों की अनदेखी कर की गई यह नियुक्ति सार्वजनिक संस्थानों की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है। इस घटनाक्रम से भविष्य में सरकारी पदों पर होने वाली नियुक्तियों में निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने को लेकर प्रशासनिक सुधारों की मांग और तेज होने की संभावना है।