लुम्बिनी विकास कोष में आनी छोइंग डोल्मा सहित विवादित नियुक्तियों के विरोध में 'लुम्बिनी बचाओ महाअभियान' ने पर्सा चौक से कोष कार्यालय तक मौन जुलूस निकाला। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस फैसले को तुरंत रद्द नहीं किया, तो आगामी त्योहार के बाद देशभर में बड़ा आंदोलन शुरू होगा।
कोष कार्यालय के सामने आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए महाअभियान के संयोजक अकरम खां ने कहा कि नियमों को दरकिनार कर की गई नियुक्ति सुशासन के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि नागरिकता विवाद में जहां राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष का पद रद्द हो गया था, वहीं विवादित नागरिकों को संरक्षण देकर सरकार देश को आंतरिक संघर्ष की ओर धकेल रही है।

सह-संयोजक मेघनाथ आचार्य ने आरोप लगाया कि योग्य और निष्पक्ष विशेषज्ञों को नजरअंदाज कर कोष को राजनीतिक भर्ती केंद्र में तब्दील कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि नागरिकता और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोपों का सामना कर रहे लोगों की नियुक्ति से लुम्बिनी की अंतरराष्ट्रीय साख और गुरुयोजना के काम प्रभावित होंगे।
नागरिकता अधिनियम 2063 की धारा 21 का उल्लेख करते हुए प्रवक्ता राम विकास चौधरी और भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता संजय कुमार मिश्र ने कहा कि फर्जी विवरण पर नागरिकता हासिल करने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का नियम है। उन्होंने चेतावनी दी कि समय रहते फैसला वापस न लेने पर यह विरोध प्रदर्शन पूरे नेपाल में फैल जाएगा।