नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा सत्तारूढ़ साझेदार राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के निर्देशों और नीतियों की लगातार अनदेखी करने से दोनों पक्षों के बीच मतभेद गहरा गए हैं। आरएसपी के प्रवक्ता मनीष झा ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार अपनी मनमानी जारी रखती है, तो पार्टी नेतृत्व कड़े फैसले लेने के लिए बाध्य होगा।

प्रेस स्वतंत्रता पर बार-बार हो रहे हमलों और प्रशासनिक हस्तक्षेप ने इस राजनीतिक विवाद को और हवा दी है। गत १३ जुलाई को ऑनलाइन खबर, हिमालय टेलीविजन और कांतिपुर जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के कार्यालयों के बाहर वाहन खड़े कर रास्ते बाधित किए गए थे। पासपोर्ट विभाग के बाहर गणेश नेपाली के आत्मदाह मामले में मीडिया कवरेज से नाराज प्रधानमंत्री समर्थकों ने इस कदम का बचाव किया, लेकिन आरएसपी महासचिव बिपिन आचार्य ने इसका कड़ा विरोध करते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की थी।

यह विवाद तब और बढ़ गया जब ३० अक्टूबर को पुलिस ने मोटिवेट न्यूज के संपादक शोभराज बरात और डीएनए खबर के मुख्य संपादक धीरज बस्नेत को गिरफ्तार कर लिया। इसके अलावा नेपाल प्रेस के पत्रकार विश्वमणि सुबेदी को हिरासत में लेकर रिहा किया गया तथा पुलिस बिना वारंट नया पत्रिका के दफ्तर में घुसी। इस मामले में जहां प्रधानमंत्री सचिवालय ने अनभिज्ञता जताई, वहीं पुलिस प्रशासन ने दावा किया कि यह कार्रवाई प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देशों पर ही की गई थी।

आरएसपी के अध्यक्ष रवि लामिछाने सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने आपात बैठक बुलाकर प्रधानमंत्री के मुख्य सलाहकार कुमार बेन और गृह मंत्री सुदन गुरुङ के करीबियों की भूमिका की जांच का निर्देश दिया था। इससे पहले १३ अक्टूबर को महासचिव आचार्य ने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और बिचौलिए के बीच हुई बातचीत के ऑडियो टेप की निष्पक्ष जांच की मांग की थी, जिस पर सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। यदि सरकार पार्टी के निर्देशों की इसी तरह उपेक्षा करती रही, तो आरएसपी गठबंधन में अपनी भूमिका पर पुनर्विचार कर सकती है।