काठमांडू / फरीदाबाद — आध्यात्मिक गुरु माता अमृतानंदमयी देवी (अम्मा) द्वारा स्थापित अमृता विश्व विद्यापीठम भारत के फरीदाबाद (दिल्ली एनसीआर) स्थित अपने परिसर में 7वें विश्व भूस्खलन मंच (WLF7) का आयोजन करने जा रहा है। इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑन लैंडस्लाइड्स (ICL) के सहयोग से 23 से 27 नवंबर 2026 तक आयोजित होने वाला यह सम्मेलन भूस्खलन विषय पर दुनिया का सबसे बड़ा वैश्विक मंच है।
इस बार सम्मेलन का मुख्य विषय "सुरक्षित और लचीले समुदायों के लिए भूस्खलन विज्ञान और व्यवहार" (Landslide Science and Practice for Safe and Resilient Communities) रखा गया है। टोक्यो (2008), रोम (2011), बीजिंग (2014), ल्युब्लियाना (2017), क्योटो (2021) और फ्लोरेंस (2023) के बाद भारत इस प्रतिष्ठित मंच की मेजबानी करने वाला पांचवां देश बन गया है। इस पांच दिवसीय आयोजन में 75 देशों के 1,900 से अधिक लेखक और 760 संस्थानों के 700 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। इसमें 1,280 से अधिक विदेशी प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है।
सम्मेलन का कार्यक्रम और तकनीकी सत्र
मुख्य सम्मेलन से पूर्व 22 नवंबर को भूस्खलन प्रबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग, सेंटिनल-1 और निसार (NISAR) उपग्रहों पर आधारित निगरानी, इनसार (InSAR), डिजिटल ट्विन्स और भू-स्थानिक मॉडलिंग पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
23 से 27 नवंबर तक चलने वाले मुख्य सत्रों में भूस्खलन और समाज के सांस्कृतिक, शैक्षणिक तथा नीतिगत पहलू, भूस्खलन पूर्व-चेतावनी प्रणाली (Early Warning System), भूस्खलन डेटा सूचीकरण और मानकीकरण के साथ-साथ जोखिम मानचित्रण और रियल-टाइम निगरानी पर विस्तृत चर्चा होगी। यह मंच क्योटो लैंडस्लाइड कमिटमेंट 2020 (KLC2020), सेंडाई फ्रेमवर्क और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के सिद्धांतों पर आधारित है।
नेपाल के लिए महत्व और भागीदारी की प्रक्रिया
हर मानसून में भूस्खलन की गंभीर प्राकृतिक आपदा का सामना करने वाले नेपाल के लिए यह सम्मेलन अत्यंत महत्वपूर्ण है। अमृता विश्वविद्यालय के शोध के अनुसार, IoT सेंसर और AI तकनीक के माध्यम से भूस्खलन से 24 घंटे पूर्व चेतावनी जारी की जा सकती है। संस्थान ने वर्ष 2006 से केरल के मुन्नार और सिक्किम में 70 से अधिक स्थानों पर 300 से अधिक सेंसर स्थापित कर व्यापक अध्ययन किया है।
अमृता की प्रो-वाइस चांसलर डॉ. मनीषा वी. रमेश ने कहा, “भूस्खलन विज्ञान की प्रत्येक प्रगति का अंतिम उद्देश्य किसी न किसी का जीवन, घर या आजीविका बचाना होना चाहिए।” उल्लेखनीय है कि अमृता के इस कार्यक्रम को लगातार तीन बार (2017-2026) भूस्खलन आपदा जोखिम न्यूनीकरण में 'वर्ल्ड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में सम्मानित किया जा चुका है।
सार्क (SAARC) सदस्य देश होने के नाते नेपाल के प्रतिभागियों के लिए 15 नवंबर 2026 तक 150 अमेरिकी डॉलर (18% जीएसटी अतिरिक्त) का अर्ली बर्ड पंजीकरण शुल्क निर्धारित किया गया है। इच्छुक प्रतिभागी आधिकारिक वेबसाइट www.wlf7.org के myWLF7 पोर्टल पर जाकर पंजीकरण और शोध पत्र प्रस्तुत कर सकते हैं। स्वीकृत शोध पत्र वाले छात्रों के लिए 200 छात्रवृत्तियां उपलब्ध हैं, जबकि 5 या उससे अधिक शोध पत्र प्रस्तुत करने वाले संस्थानों को 15 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।