काठमांडू — गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालते ही गृह मंत्री सुधन गुरुङ ने नेपाल के इतिहास के सबसे चर्चित और रहस्यमयी माने जाने वाले नारायणहिटी दरबार हत्याकांड की जांच प्रक्रिया को पुनः आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

मंगलवार शाम मंत्रालय में पदभार ग्रहण करने के दौरान उनके द्वारा लिए गए शुरुआती चार प्रमुख निर्णयों में, 1 जून 2001 (19 जेठ 2058 बीएस) को हुए इस वीभत्स हत्याकांड की फाइल खोलने और जांच आगे बढ़ाने के विषय को प्राथमिकता में रखा गया है। 24 वर्ष पहले हुई इस घटना में तत्कालीन राजा वीरेंद्र, रानी ऐश्वर्या सहित राजपरिवार के सदस्यों की सामूहिक हत्या कर दी गई थी।

पूर्व राजा ज्ञानेंद्र को क्लीन चिट मिलने की संभावना और राजनीतिक तरंग

दरबार हत्याकांड के बाद नेपाल के राजनीतिक हलकों और जनमानस में विभिन्न प्रकार की टिप्पणियां चलती आ रही थीं। विशेष रूप से घटना के समय काठमांडू से बाहर रहे और बाद में राजा बने पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह पर विभिन्न कोणों से आशंकाएं और आरोप लगते आ रहे थे।

अब यदि सरकार खुद आधिकारिक रूप से इस विषय पर निष्पक्ष और गंभीर जांच आगे बढ़ाती है, तो वर्षों से लगते आ रहे उन आरोपों से पूर्व राजा ज्ञानेंद्र को कानूनी रूप से क्लीन चिट (दोषमुक्ति) मिलने की संभावना प्रबल हो गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि निष्पक्ष जांच के माध्यम से पूर्व राजपरिवार पर लगते आ रहे भ्रमों और आरोपों का निवारण हो जाता है, तो यह अनुमान लगाया गया है कि इससे देश में 'राजसंस्था' और पूर्व राजपरिवार के प्रति जनता की सहानुभूति तथा आकर्षण और बढ़ सकता है। वर्तमान राजनीतिक दलों और शासन व्यवस्था के प्रति नागरिकों में बढ़ते असंतोष के बीच इस निर्णय ने एक नई बहस छेड़ दी है।

डॉ. उपेन्द्र देवकोटा का ऐतिहासिक दावा

इससे पहले दरबार हत्याकांड की जांच के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति में शामिल तत्कालीन वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. उपेन्द्र देवकोटा ने दावा किया था कि यह हत्याकांड तत्कालीन युवराज दीपेंद्र शाह ने ही मचाया था। इलाज के दौरान सैन्य अस्पताल में दीपेंद्र की स्वास्थ्य स्थिति और घटना के तकनीकी पहलुओं को करीब से देखने वाले डॉ. देवकोटा ने अपने विभिन्न साक्षात्कारों में स्पष्ट किया था कि घटना के मुख्य कारक युवराज दीपेंद्र ही थे और इसमें अन्य बाहरी शक्तियों या पूर्व राजा ज्ञानेंद्र का कोई हाथ नहीं था।

लंबे समय से ओझल रहे इस संवेदनशील मुद्दे को वर्तमान गृह मंत्री द्वारा पुनर्जीवित किए जाने के साथ ही, अब यह जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी और इससे नेपाल की राजनीति में कैसा बदलाव आएगा, यह विषय हर तरफ कौतूहल का केंद्र बन गया है।

ADVERTISEMENT Nepal Aaja Register