पत्रकार, संपादक एवं फैक्ट-चेकर उमेश श्रेष्ठ के प्रेस काउंसिल नेपाल के अध्यक्ष बनने के बाद काउंसिल की गरिमा और सक्रियता में एक नया आयाम जुड़ा है। मीडिया की मर्यादा और पेशेवर आचार संहिता का पालन कराने के लिए काउंसिल की तत्परता को देखते हुए अब खुद कानूनविद भी काउंसिल में शिकायतें और याचिकाएं दर्ज कराने पहुंचने लगे हैं। इसी क्रम में, गौतम स्वीट्स (टिपटॉप) की ओर से अधिकृत अधिवक्ता दीपक राय द्वारा दायर शिकायत पर संज्ञान लेते हुए प्रेस काउंसिल नेपाल ने 'नेपाल आज' को संबोधित करते हुए एक पत्र जारी किया है।
काउंसिल द्वारा पूछे गए चार मुख्य बिंदु
काउंसिल द्वारा भेजे गए पत्र में पत्रकार आचार संहिता, २०७३ (पहिला संशोधन, २०७६) के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए मुख्य रूप से चार विषयों पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। पहला, एक दशक पुरानी घटना को प्रायोजित और अप्रासंगिक रूप से प्रस्तुत कर आम जनता में भ्रम फैलाने के विषय में जवाब तलब किया गया है। दूसरा, समाचार में किए गए दावों की पुष्टि करने वाले दस्तावेज या तथ्यात्मक प्रमाण प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए काउंसिल ने टिपटॉप समोसे के भीतर चूहा मिलने का प्रमाण मांगा है। तीसरा, समाचार प्रसारित करने से पूर्व आरोपी पक्ष की प्रतिक्रिया लेने के लिए क्या संपादकीय प्रयास किए गए, यदि प्रतिक्रिया मिली तो उसे शामिल क्यों नहीं किया गया या यदि प्रतिक्रिया नहीं ली गई तो उसका क्या कारण था, यह सवाल उठाया गया है। चौथा, किसी को अनुचित लाभ या हानि पहुंचाने की नीयत से पेशेवर मर्यादा के विपरीत कार्य न करने के नियम का स्मरण कराते हुए, दशक पुराने प्रसंग को हालिया घटना की तरह सोशल मीडिया पर न्यूजकार्ड बनाकर प्रसारित करने का कारण और सामग्री को निष्पक्ष रूप से तैयार करने का वस्तुनिष्ठ आधार स्पष्ट करने को कहा गया है। उपभोक्ता अधिकारों के विषय पर मीडिया सामग्री के संबंध में नियामक निकाय द्वारा इस तरह की सूक्ष्म एवं विशिष्ट शैली में बिंदुवार स्पष्टीकरण मांगे जाने को मीडिया जगत में भारी दिलचस्पी के साथ देखा जा रहा है।

काठमांडू महानगरपालिका की पिछली कार्रवाई का रिकॉर्ड
दूसरी ओर, खाद्य सुरक्षा के संदर्भ में टिपटॉप दुकान का अतीत में भी स्थानीय प्रशासन के बाजार अनुगमन के दौरान कार्रवाई की जद में आने का रिकॉर्ड रहा है। काठमांडू महानगरपालिका में बालेन्द्र (बालेन) शाह के मेयर रहने के दौरान (विक्रम संवत २०८०) टिपटॉप समोसा दुकान पर महानगरपालिका द्वारा प्रत्यक्ष कार्रवाई की गई थी। बाजार निरीक्षण के दौरान काठमांडू महानगरपालिका-१७ स्थित उक्त दुकान में निर्मित 'दूधबरी' सहित अन्य मिठाइयों में अखाद्य और गुणवत्ताहीन सामग्रियां मिलने पर महानगरपालिका ने टिपटॉप पर दो लाख रुपये का नकद जुर्माना लगाया था। नियमित अनुगमन के दौरान अखाद्य वस्तुएं मिलने के बाद महानगरपालिका ने दुकान में अस्वास्थ्यकर सामग्रियां न रखने, कर्मचारियों के व्यावहारिक व्यवहार व बातचीत में सुधार लाने तथा दुग्ध उत्पादों का आवश्यक तापमान बनाए रखने के सख्त निर्देश भी जारी किए थे।
टिपटॉप संचालकों की चुप्पी और कानूनी प्रक्रिया
इस पूरे मामले पर टिपटॉप के संचालक प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया देने के लिए संपर्क में नहीं आना चाहते हैं और उन्होंने सभी कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए कानूनी सलाहकारों को ही आगे बढ़ाया है। तत्कालीन मेयर बालेन्द्र शाह के कार्यकाल में महानगरपालिका द्वारा लगाए गए रु. दो लाख जुर्माने और जारी निर्देशों पर गौतम स्वीट्स का आधिकारिक रुख जानने का प्रयास किए जाने पर टिपटॉप के प्रतिनिधि अधिवक्ता दीपक राय ने इस विषय पर बोलने से इनकार कर दिया। अधिवक्ता राय ने मामला वर्तमान में प्रेस काउंसिल नेपाल में विचाराधीन होने का हवाला देते हुए कहा कि उनका ध्यान काउंसिल से अनुरोध कर कानूनी प्रक्रिया को तार्किक परिणति तक पहुंचाने पर केंद्रित है। हालांकि, मीडिया ने स्पष्ट किया है कि यदि टिपटॉप के संचालक या आधिकारिक हितधारक भविष्य में कोई अतिरिक्त स्पष्टीकरण या अपना पक्ष रखना चाहते हैं, तो उन्हें पुनः स्थान दिया जाएगा।
खाद्य सुरक्षा और जिम्मेदार पत्रकारिता
आम जनता के स्वास्थ्य और उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए मीडिया की निरंतर निगरानी और नियामक निकायों द्वारा अपनाई जाने वाली कानूनी प्रक्रियाएं समग्र बाजार व्यवस्था को मर्यादित बनाने में योगदान देती हैं। स्थानीय सरकार के पूर्व अनुगमन रिकॉर्ड, मीडिया के सामाजिक उत्तरदायित्व और प्रेस काउंसिल द्वारा शुरू की गई कानूनी समीक्षा से खाद्य सुरक्षा और जिम्मेदार पत्रकारिता के स्थापित मानकों के अधिक पारदर्शी एवं मजबूत होने की संभावना है।
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