नेपाल के प्रशासनिक और न्यायिक तंत्र में जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर इनम सापकोटा मामले में उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच की आवाज तेज हो गई है। जांच प्रक्रिया के सीमित और एकतरफा होने की आशंका व्यक्त करते हुए जेन-जी मूवमेंट नेपाल ने न्यायपालिका से लेकर कार्यपालिका तक फैले संभावित तंत्र की पूरी निष्पक्षता से जांच करने के लिए एक अधिकार संपन्न स्वतंत्र नागरिक आयोग (लोकपाल) के गठन की मांग की है।
रविवार (14 कार्तिक) को जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में जेन-जी आंदोलन के नेता रवि किरण हमाल ने कहा कि वर्तमान में सार्वजनिक की जा रही जानकारियां और जांच के तरीके निष्पक्षता पर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब न्यायालय से जुड़े लोगों पर सवाल उठ रहे हैं, तो सांसदों, मंत्रियों और प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों को जांच के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता। हमाल के अनुसार, किसी भी व्यक्ति का पद, पहुंच या राजनीतिक प्रभाव जांच की सीमा निर्धारित नहीं कर सकता।
आंदोलन द्वारा प्रस्तावित नागरिक आयोग के लिए पूर्ण वैधानिक स्वायत्तता और व्यापक कानूनी अधिकारों की वकालत की गई है। हमाल ने जोर देकर कहा कि इस आयोग में उच्च नैतिक मूल्यों वाले निष्पक्ष और प्रबुद्ध व्यक्तियों को शामिल किया जाना चाहिए। इस निकाय को महत्वपूर्ण दस्तावेज और रिकॉर्ड मंगाने, संबंधित व्यक्तियों को समन करने, साक्ष्य जुटाने और विधिक कार्रवाई की सिफारिश करने का पूरा अधिकार मिलना चाहिए ताकि यह किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव से पूरी तरह मुक्त रहकर कार्य कर सके।
राज्य व्यवस्था में मौलिक बदलाव की आवश्यकता पर जोर देते हुए हमाल ने कहा कि केवल सत्ता या राजनीतिक नेतृत्व का बदलना ही असली परिवर्तन नहीं है। राज्य के संस्थानों का शुद्धीकरण ही जेन-जी आंदोलन का मुख्य उद्देश्य था। उन्होंने कहा कि आरोपी सभी व्यक्तियों को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार मिलना चाहिए, लेकिन साक्ष्यों के आधार पर दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सख्त कानूनी कार्रवाई का सामना करना होगा।
