सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस समय राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के सांसद पुरुषोत्तम यादव की जीवनशैली और अचानक बढ़ी आर्थिक समृद्धि को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ‘साइलेन्स ब्रेकर’ नामक फेसबुक यूजर द्वारा आगामी चुनावों के टिकट वितरण से जोड़कर लिखी गई एक लंबी पोस्ट के बाद यादव पर लगे विभिन्न आरोपों की चर्चा चाय की दुकानों से लेकर चौराहे-चौराहों तक हो रही है।

सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि और सांसद का वेतन

सांसद पुरुषोत्तम यादव की पारिवारिक आर्थिक स्थिति अतीत में काफी कमजोर बताई जाती है। उनके पिता एक छोटी सी किराना दुकान चलाकर परिवार का गुजारा करते थे। लेकिन, सांसद बनने के बेहद कम समय में यादव की जीवनशैली में आए आलीशान बदलाव ने आम लोगों को हैरान कर दिया है। नेपाल में एक सांसद को मिलने वाले सीमित वेतन और सुविधाओं के बल पर इतने कम समय में करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित करना लगभग असंभव माना जाता है। इसी कारण आम जनता उनकी इस असामान्य आर्थिक प्रगति पर सवाल उठाते हुए तरह-तरह के कयास लगा रही है।

रवि लामिछाने से नजदीकी और टिकट बिक्री की चर्चा

सांसद यादव को पार्टी अध्यक्ष रवि लामिछाने का बेहद करीबी और भरोसेमंद माना जाता है। आगामी स्थानीय और प्रांतीय चुनावों के लिए उम्मीदवारों के चयन का अध्ययन करने हेतु अध्यक्ष लामिछाने ने अपने सांसदों को अंतर-जिला जिम्मेदारियां देकर भेजा है। मधेस क्षेत्र में अच्छा प्रभाव रखने वाले यादव पर इसी जिम्मेदारी का फायदा उठाकर टिकट बेचने का आरोप लगा है। सोशल मीडिया पर किए गए दावों के अनुसार, टिकट दिलाने का आश्वासन देकर एक बिचौलिए के माध्यम से उन्होंने किसी राजस्थानी-नेपाली व्यापारी से 80 लाख रुपये वसूले होने की खबर चर्चा में है।

काठमांडू में मकान, फ्लैट और करोड़ों की गाड़ियां

जनचर्चाओं और सियासी गलियारों की अफवाहों पर यकीन करें तो सुशीला कार्की की सरकार के गठन के बाद यादव पर अवैध वसूली का धंधा चलाने का आरोप है। कहा जा रहा है कि इसी रकम से उन्होंने काठमांडू के नया बानेश्वर स्थित आलोकनगर में ढाई मंजिल का मकान और सिनामंगल में एक अपार्टमेंट खरीदा है।

इतना ही नहीं, उनके द्वारा खरीदी गई करोड़ों रुपये की गाड़ियों के मुद्दे ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। स्रोत छिपाने के लिए उन पर अलग-अलग व्यक्तियों के नाम से गाड़ियां खरीदने का आरोप है। चर्चा के मुताबिक, उन्होंने अपनी मां आशा देवी के नाम पर 'एमजी' कार, नबिल कारक के नाम पर 'इसुजु डी-मैक्स' (जो केदारनाथ शर्मा के साले से खरीदी बताई जाती है), दोस्त अंकित यादव के नाम पर 'रिडारा पिकअप इलेक्ट्रिक' और किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर 'बीवाईडी' गाड़ी खरीदी है। अनुमान लगाया जा रहा है कि उन्होंने अपने और परिवार के नाम के अलावा अप्रत्यक्ष रूप से अन्य जगहों पर भी भारी धन-संपत्ति छिपा रखी है।

जेन-जी नेताओं के बीच आर्थिक असमानता और जन-आक्रोश

नेपाली राजनीति में हाल के दिनों में उभरी जेन-जी (Gen-Z) पीढ़ी से जनता को बड़ी उम्मीदें थीं। लेकिन, इसी पीढ़ी के नेताओं के बीच दिख रही चरम आर्थिक असमानता ने कई लोगों को अचंभित कर दिया है। एक तरफ राजनीति में सक्रिय कुछ ईमानदार युवा नेताओं के पास पठाओ, इनड्राइव और यांगो जैसे राइड-शेयरिंग ऐप से सफर करने तक का सामान्य किराया नहीं होता, वहीं दूसरी तरफ यादव जैसे कुछ नेताओं के अल्प समय में ही करोड़पतियों की सूची में शामिल होने पर तीखी आलोचना हो रही है। हालांकि, सांसद यादव को अदालत या कानून द्वारा दोषी ठहराया जाना अभी बाकी है और ये सभी बातें फिलहाल सार्वजनिक चर्चाओं और अनुमानों तक सीमित हैं, लेकिन इतने कम समय में दिखी इस विलासी जीवनशैली ने नई पीढ़ी की राजनीति और उनकी नीयत पर गंभीर प्रश्न चिह्न खड़े कर दिए हैं।